मुजफ्फरनगर 01 जनवरी। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद स्थित खतौली कस्बे के एक परिवार में भावुक भरा पल उस समय देखने को मिला जब मृतक मान लिए गए एक बुजुर्ग चाचा शरीफ 28 साल बाद अपने घर लौटे.
बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों के लिए चाचा शरीफ को अपने घर लौटना पड़ा, जिसके बाद घर वालों की खुशियों का ठिकाना ना रहा. दरअसल खतौली कस्बा स्थित मोहल्ला बालक राम निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति शरीफ की पहली पत्नी का इंतकाल सन् 1997 में हो गया था.
फिर दूसरी शादी करने के बाद अपनी पत्नी के साथ शरीफ पश्चिम बंगाल चले गए थे. कुछ समय तक तो परिवार से संपर्क रहा. लेकिन धीरे-धीरे वह संपर्क टूट गया, जिसके बाद परिवार के लोगों ने शरीफ के बताए गए पश्चिम बंगाल के पते पर जाकर भी उन्हें ढूंढने की कोशिश की. जब कुछ पता ना चला तो परिवार वालों ने शरीफ को मृत मान कर संतोष कर लिया. लेकिन शुरू हुई एसआईआर में जब बुजुर्ग शरीफ को दस्तावेजों की जरूरत हुई तो वह अचानक से 2 दिन पूर्व 28 साल बाद अपने घर वापस लौटा, जिसके बाद उसके परिवार वालों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा.
बरहाल, इस दौरान बुजुर्ग शरीफ को यह भी पता चला कि इन 28 सालों में उसके परिवार के बहुत से लोगों का इंतकाल भी हो चला है. जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग शरीफ जरूरी कागजात लेने के बाद सभी अपने परिवार वालों से मिलकर एक बार फिर से पश्चिम बंगाल लौट गए हैं. इस दौरान बुजुर्ग शरीफ ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वे दानापुर में पिछले 28 सालों से रह रहे हैं.
शरीफ के भतीजे मोहम्मद अकलिम ने बताया कि शरीफ उनके चाचा हैं. उनकी पहली पत्नी का इंतकाल 1997 में हो गया था, इसके बाद उन्होंने बंगाल में दूसरी शादी कर ली और वहीं चले गए. उस समय फोन नहीं होते थे. दो नंबर अपने और एक नंबर चाचा का तीन नंबर मैंने उनको दिए थे, लेकिन उसके बाद से इनका कोई अता-पता नहीं चला. उन्होंने हमें बताया था कि खड़कपुर के अंदर एक मोती टेलर है मालूम कर लेना… वहां रहता हूं.
उन्होंने आगे बताया कि परिवार ने उन्हें 15-20 साल तक बहुत ढूंढा. खड़गपुर, आसनसोल और आसपास के इलाकों में लोगों से पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. धीरे-धीरे सबने मान लिया कि शायद उनका इंतकाल हो गया है. फिर अचानक छोटे भाई के फोन से खबर मिली कि चाचा शरीफ वापस आ गए हैं. पहले तो यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब सामने देखा तो पता चला कि वे सच में जिंदा हैं. यह खबर फैलते ही मोहल्ले और रिश्तेदारों की भीड़ लग गई. दूर-दराज के रिश्तेदार वीडियो कॉल पर उनसे बात कर रहे हैं.
शरीफ दस्तावेज बनवाने (एसआईआर फॉर्म) के लिए आए थे. बीएलओ से बात हुई और जरूरी कागज़ात भेजने की बात तय हुई. अब उन्हें पता चल रहा है कि इतने सालों में परिवार में कौन जिंदा है और किन-किन का इंतकाल हो चुका है. उन्हें यह भी मालूम हुआ कि उनके जाने के बाद 2004 में उनके पिता (दादा) का भी इंतकाल हो गया था.
खुद शरीफ ने बताया कि 1997 में शादी के बाद वे अपनी पत्नी के साथ बंगाल चले गए थे. वहां वेदनापुर इलाके में रहे. उस समय कोई खास व्यवस्था या संपर्क का साधन नहीं था, इसलिए परिवार से पूरी तरह संपर्क टूट गया. अब लगभग 28-29 साल बाद सरकारी काम के लिए दस्तावेज बनवाने आए, तभी परिवार से फिर मुलाकात हो पाई.

