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    दलबदल रोकने हेतु केन्द्र सरकार को भी हिमाचल जैसा संशोधन विधेयक लाकर राजनीति में पादर्शिता को बढ़ावा देना चाहिए

    adminBy adminApril 3, 2026No Comments1 Views
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    दलबदल को रोकने हेतु हिमाचल विधानसभा में सदस्यों के वेतन भत्ते और पेंशन संशोधन विधेयक 2026 बिल पारित कर दिया। जो अब प्रदेश के महामहिम राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति प्राप्त होते ही यह लागू हो जाएगा एक खबर से पता चलता है कि भाजपा ने इस कदम को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। भाजपा नेता रणदीप शर्मा का कहना है कि यह पूर्व कांग्रेस विधयकों को सजा देने के लिए लाया गया है अगर ऐसा है भी तो इसमें परेशानी क्या है दलबदल रोकने की बात तो हमेशा ही होती रही है इससे इस खबर को पढ़कर आज कुछ मतदाताओं के बीच होने वाली चर्चा भी सही लगती है कि यह कानून तो केन्द्र में आसीन भाजपा सरकार को लाना चाहिए था। क्योंकि विधानसभा और लोकसभाओं में चुने गये राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के इधर उधर पार्टी छोड़कर जाने यानी दलबदल पर रोक लगाने के लिए वक्त की बडी आवश्यकता है क्योंकि इससे मतदाताओं को भी ऐसे जनप्रतिनिधियों से विश्वास उठता है जिन्हें वह जिताकर तो कहीं भेजते हैं ओर वह कहीं और चले जाते हैं।
    आप पार्टी के राज्य सभा सदस्य राघव चढ्डा को आप पार्टी ने सांसद बनाया और अब जो आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं उनसे यह संभावना बन रही हैं कि भविष्य में वह कुछ भी निर्णय ले सकते हैं। तो दूसरी तरफ उत्तराखंड में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बात से नाराज है कि रामनगर के संजय नेगी को पार्टी ज्वाइन न कराने से कांग्रेस में असंतोष की खुली बगावत शुरू हुई है। अगर यह चली तो कहीं न कहीं पार्टी को बडा नुकसान हो सकता है।
    जनमानस की इस भावना से हम भी सहमति व्यक्त रखते हैं कि जो जिस पार्टी से चुनकर आया या जिसने उसे बनाया उस जनप्रतिनिधि को अपना कार्यकाल उसी पार्टी में रहकर पूरा करना चाहिए और अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उसे अपनी सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए चाहे वह लोकसभा हो या राज्यसभा जहां का भी वह सदस्य है वहा से वह इस्तीफा दे यह भी दलबदल कानून में शामिल कर केन्द्र सरकार को जनमानस की भावनाओं का आदर करते हुए भले ही हिमाचल में कांग्रेस की सरकार ने यह निर्णय लिया हो उसका पूर्ण मनन कर वह भी ऐसा संशोधन विधेयक लाये जिससे दलबदल या पार्टी छोड़ने की जो अंधी दौड़ चलती रहती है उस पर विराम लग सके।
    राजनीति में स्वच्छता और विश्वसनीयता और पादर्रिता कायम रखने के लिए यह सबसे जरूरी है जिस पर आदरणीय प्रधानमंत्री जी और देश में वर्तमान में सबसे बड़ा राजनीतिक दल होने की जिम्मेदारी निभाते हुए भाजपा को इस पर सर्वदलिय बैठक बुलाकर कोई सर्वसम्मत निर्णय इस क्षेत्र में सुधार और नई पीढ़ी को अच्छी प्रेरणा देने के लिए करना चाहिए।
    प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के संस्थापक राष्ट्रीय महामंत्री व मजीठिया बोर्ड उत्तर प्रदेश के पूर्व सदस्य संपादक पत्रकार

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