नई दिल्ली, 26 मार्च (जा)। देश के संस्थानिक विकास तथा प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ माने जाने वाली शीर्ष नौकरशाही भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तथा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर के सैंकडों पद तमाम राज्यों में खाली पड़े हैं। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक आईएएस कैडर के 1300 पद तो आईपीएस कैडर के भी 505 पद रिक्त हैं। अंडमान-निकोबार, गोवा, मेघालय तथा केंद्र शासित प्रदेश यानि एजीएमयूटी कैडर में आइएएस के सबसे अधिक 136 पद खाली हैं। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश में इस संवर्ग के 81 पद रिक्त हैं। वहीं आईपीएस कैडर के सबसे ज्यादा 63 पद ओडिसा में खाली हैं।
उत्तरप्रदेश के बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरल और मध्यप्रदेश में आइएएस के सबसे अधिक पद रिक्त हैं तो आईपीएस कैडर में ओडिसा के बाद कर्नाटक, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और पंजाब में सबसे अधिक पद खाली हैं।
आईएएस कैडर के 1300 और आईपीएस कैडर के भी 505 पद रिक्त है। आइएसएस तथा आईपीएस कैडर के तमाम राज्यों में कुल स्वीकृत पदों तथा पांच वर्ष के दौरान एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग की हुई नियुक्तियों का आंकड़ा साझा करने के दौरान यह तथ्य सामने आए।
केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिह ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि 1 जनवरी 2025 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश भर में आइएएस कैडर के कुल स्वीकृत 6877 पद के मुकाबले 5577 अधिकारी कार्ययरत हैं। यानि आइएएस के 1300 पद खाली हैं। जबकि आईपीएस के कुल 5099 पद के मुकाबले 4594 कार्यरत हैं और इस संवर्ग के 505 पद रिक्त हैं। एजीएमयूटी कैडर में आइएएस के 542 की तुलना में 406 अधिकारी कार्यरत हैं और 136 पद खाली हैं। उत्तरप्रदेश में 652 कुल पदों की तुलना में 571 आइएएस तैनात हैं और 81 पद रिक्त हैं। महाराष्ट्र में 76 पद खाली हैं और 435 की जगह 359 आइएएस कार्यरत हैं।
पश्चिम बंगाल भी पीछे नहीं जहां 75 पद रिक्त हैं और 378 की के मुकाबले वर्तमान तैनाती 303 की है। शीर्ष नौकरशाही में एक समय वर्चस्व रखने वाले केरल का आंकड़ा चौंकाने वाला है जहां आइएएस कैडर के 231 पद के मुकाबले तैनाती 157 है और 74 पद खाली हैं। बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश में भी आइएएस कैडर के 68 पद खाली हैं जहां 459 की जगह 391 कार्यरत हैं। राजस्थान में 64, ओडिसा में 63 तथा गुजरात में 58 पद रिक्त हैं। बिहार में आइएएस के 359 पद के मुकाबले 303 कार्यरत हैं और 56 पद खाली हैं।प्रशासनिक ²ष्टिकोण से देखा जाए तो मझोले और छोटे राज्यों में भी औसतन खाली पद अधिक हैं।
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