सिविल सेवा परीक्षा यूपीएससी के आए परिणाम काफी आशाजनक तो हैं ही जिन बच्चों ने इनमें सफलता पाई है उनके पारिवारिक माहौल और अनुशासन से सीख लेकर मध्यम और गरीब उन परिवारों के बच्चे जो हमेशा यह कहते सुने जाते हैं कि सुविधा नहीं है हम कैसे आगे बढ़ें। इस परीक्षा में पास हुए लोगों की दिनचर्या का मनन कर वो अपने लिए आगे का मैदान तय कर सकते हैं।
इस परीक्षा में शामली में पुलिस ट्रेनी आस्था जैन तो मेरठ मेडिकल कॉलेज में क्लर्क की पुत्री गाजीपुर गांव की रहने वाली २४ वर्षीय वंशिका कंकरखेड़ा की पुलकिता अंजना तो कहीं किसान के बेटे तो कुछ सुविधाविहीन परिवार से जुड़े खेतों की पगडंडियों पर भागदौड़ करते सामान्य माहौल में शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले या दूसरे प्रयास में आईएएस बन गए। इस परीक्षा में जोधपुर से एमबीबीएस अनुज अग्निहोत्री ने देश में टॉप किया तो अपने प्रदेश के अनेक नौजवानो ने अपने मां बाप से लेकर शहर और गांव का नाम रोशन किया। क्योंकि यह परीक्षा कोई मामूली नहीं होती। इसमें पास होने के बाद समाज के लिए कुछ करने का मौका आपके लिए होता है तो वहीं सामान्य परिवारों की बेटी बेटों की शादी अपने परिवार में करने के लिए राजनेता और उद्योगपति लाललियत रहते हैं
मैंने देखा कि इस नौकरी में आने के बाद गरीब अमीर और जाति के बंधन खत्त्म हो जाते हैं। इन्हें कुछ करने और अपने मन से जीवन जीने का अवसर मिलता है। इनके मां बाप और परिवार का मान सम्मान बढ़ जाता है। परीक्षा परिणाम में बेटियों ने भी अपने परिवार का नाम रोशन किया है। ऐसे परिवारों के बच्चे जो इसमें पास हुए कोई कहीं कलेक्टर होगा तो कोई इनकम टैक्स कमिश्नर कोई एसएसपी बनकर प्रमुख पदों के साथ ही मंत्रालय में महत्वपूर्ण पदों पर रहकर काम करेंगे। जहां वह समाज का भला करने में सक्षम होंगे। हम सोशल मीडिया एसोसिएशन के राष्ट्रीय महामंत्री अंकित बिश्नोई के इस कथन से सहमत हैं कि समाज में जितना काम यह पास छात्र कर सकते हैं उतना तो कोई बड़ा राजनेता भी नहीं कर सकता क्योंकि वह वह नीतियां बना सकते हैं लेकिन लागू करने देश के समग्र विकास में अनुज अग्निहोत्री पुलकिता वंशिका तुषार गिरी प्राची हर्ष नेहरा जैसे युवा अधिकारी कर सकते हैं। हम सभी परीक्षा पास करने वाले नौजवानों की प्रगृति और खुशहाली की कामना करते हुए इनके परिवारों को बधाई देते हुए यह आशा करते हैं कि वो अपने आसपास के बच्चों को प्रोत्साहन देकर अपने बच्चों से उनकी कांउसिलिंग कराकर उन्हें आगे बढ़ने का मौका देंगे। क्योंकि कई लोग ऐसे होते हैं जो बिना किसी सपोर्ट के अपने कठिन मार्ग को पार करते हैं और कई ऐेसे होते हैं कि जिन्हें थोड़ी सी रोशनी दिखाई जाए तो वो उसका सहारा लेकर आगे बढ़ जाते हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारे बच्चे इस परीक्षा को पास कर देश के विकास में भूमिका निभाएंगे। इनमें से कुछ जो विदेश चले जाते हैं वो वहां जाकर भी देश का झंडा फहराने में पीछे नहीं रहेंगे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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