अहमदाबाद 05 मार्च। अहमदाबाद में एक गैर-कानूनी क्रिकेट बेटिंग और एक बड़े स्टॉक मार्केट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। यहां मात्र 10 से 12 हजार रुपये कमाने वाले एक रैपिडो ड्राइवर के अकाउंट से 550 करोड़ की नकली बैंक ट्रांजैक्शन हुई। इसके बाद जांच एजेंसियो को इस संदिग्ध एक्टिविटी का पता चला। ईडी इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
ईडी ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब किया जब उन्हें रैपिडो ड्राइवर प्रदीप ओडे के अकाउंट में 300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा के ट्रांजैक्शन का पता चला। जांच करने पर अधिकारियों को पता चला कि रैपिडो ड्राइवर के बैंक अकाउंट का इस्तेमाल कथित तौर पर गैर-कानूनी क्रिकेट बेटिंगऔर स्टॉक मार्केट मैनिपुलेशन से जुड़े फंड को रूट करने के लिए किया जा रहा था। जांच अधिकारियों ने इसे ऑर्गनाइज्ड फाइनेंशियल क्राइम सिंडिकेट बताया है।
ED की पूछताछ में दीप ने कबूल किया कि उसने अपना बैंक खाता ₹25 हजार में करण परमार उर्फ लाला को किराये पर दिया था। चेक पर हस्ताक्षर करने के बदले उसे ₹400 प्रति चेक दिए जाते थे। दीप के पैन कार्ड और आधार कार्ड के आधार पर “दीप एंटरप्राइजेज” नाम की फर्म भी बनाई गई थी।
इसके अलावा कमलेश ट्रेडिंग और रोनक ट्रेडर्स नाम की दो कंपनियां भी केवल कागजों पर बनाई गई थीं। वर्ष 2024 में खोले गए बैंक खातों में लगभग ₹550 करोड़ का लेनदेन होने का खुलासा हुआ है। वास्तव में ये कंपनियां कोई वास्तविक व्यापार नहीं कर रही थीं। किराये पर लिए गए खातों के माध्यम से फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये का हवाला लेनदेन किया जा रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि ये कंपनियां 2024 में रजिस्टर हुई थीं और ऐसा माना जा रहा है कि इनका कोई असली बिजनेश नहीं चल रहा था। लेकिन उनके बैंक अकाउंट में भारी डिपॉजिट दर्ज थे, जो कुल मिलाकर 550 करोड़ रुपये थे। ईडी ने बताया कि जांच के दायरे में आए ट्रांजैक्शन के तहत तीन अलग-अलग कंपनियों में 80.50 करोड़, 52.11 करोड़ और 22.86 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि इन अकाउंट्स का इस्तेमाल ऑनलाइन क्रिकेट बेटिंग ऑपरेशन से मिले फंड को इधर-उधर करने के लिए किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आगे की एनालिसिस से स्टॉक मार्केटमें सर्कुलर ट्रेडिंग का भी पता चला। सर्कुलर ट्रेडिंग एक ऐसा तरीका है जिसका इस्तेमाल ट्रेडिंग वॉल्यूम को आर्टिफिशियली बढ़ाने और कीमतों में हेरफेर करने के लिए किया जाता है। जांचकर्ताओं ने इम्पैक्ट गुरु के ज़रिए पेनी स्टॉक ट्रांज़ैक्शन और संदिग्ध डोनेशन से जुड़ी गड़बड़ियों का भी पता लगाया, जिससे पता चलता है कि कमाई को लॉन्ड्र करने के लिए कई फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल किया गया था।

