नई दिल्ली, 25 फरवरी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केरल का नाम बदलने वाले विधेयक को अब राज्य विधानसभा में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि नए पीएमओ भवन में आयोजित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में 140 करोड़ लोगों के हित में सभी निर्णय लेने का प्रस्ताव पारित किया गया।
नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भवन ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित यूनियन कैबिनेट की यह पहली बैठक थी। केरल विधानसभा ने 24 जून, 2024 को आम सहमति से एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें केंद्र से राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘केरलम’ करने का आग्रह किया गया था। केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को दूसरी बार पारित किया क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले प्रस्ताव की समीक्षा करते हुए कुछ तकनीकी बदलावों का सुझाव दिया था। इसी क्रम में मोदी कैबिनेट ने केरल सरकार के राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह कदम अप्रैल-मई में होने वाले केरल विधानसभा चुनावों से पहले उठाया गया है। विधानसभा के प्रस्ताव के बाद गत दिवस हुई यूनियन कैबिनेट की मीटिंग में राज्य का नाम केरल से बदलकर केरलम करने को मंजूरी दे दी गई है। केरल विधानसभा ने दूसरी बार प्रस्ताव पास किया था क्योंकि गृह मंत्रालय ने कुछ टेक्निकल बदलावों का सुझाव दिया था।इस प्रस्ताव को पेश करने वाले मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन चाहते थे कि केंद्र सरकार संविधान के आठवें शेड्यूल में शामिल सभी भाषाओं में दक्षिणी राज्य का नाम केरल से बदलकर केरलम कर दे।
प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य को मलयालम में ‘केरलम’ कहा जाता है और मलयालम बोलने वाले समुदायों के लिए एक संयुक्त केरल बनाने की मांग राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही जोरदार तरीके से उठी है। लेकिन उन्होंने कहा था कि संविधान के पहले शेड्यूल में राज्य का नाम केरल लिखा है। सदन ने अगस्त 2023 में भी एक जैसा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास करके केंद्र को भेजा था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उसमें कुछ टेक्निकल बदलाव सुझाए थे।
कब बना केरल राज्य?
आजादी के बाद जब भारत में छोटी-छोटी रियासतों का विलय हुआ तो 1 जुलाई, 1949 को त्रावनकोरे और कोचीन को मिलाकर ‘त्रावनकोर कोचीन’ राज्य बना दिया गया था। इसके बाद 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत त्रावनकोर-कोचीन राज्य और मालाबार को मिलाकर केरल राज्य बना दिया गया। हिंदू और मुस्लिम के अलावा यहां ईसाई धर्म के लोग भी बड़ी संख्या में रहते है।
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