देश में समय से ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव तय तिथि पर कराए जाते रहें हैं। ज्यादातर निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न भी हो जाते हैं। इसके बावजूद देश के कुछ कॉलेज और विवि में छात्र संघ चुनाव कराने की लगातार उठती मांग तथा छात्र नेताओं द्वारा इस बारे में कुलपति प्राचार्य और जनप्रतिनिधियों व सरकार का ध्यान इस ओर दिलाने और इसके लिए अनेको बार कई जगह धरना प्रदर्शन होने के बाद भी आखिर छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे और इनमें परेशानी क्या है। अगर कोई कहे कि छात्रसंघ चुनाव से कई परेशानियां होती हैं वो तो हर चुनाव में होती है।
मीडिया में मिलने वाली खबरों से पता चलता है कि जनप्रतिनिधि समय समय पर अपनी जनसभाओं में छात्रसंघ चुनावों का समर्थन भी करते हैं और यह भी कहा जाता है कि जिस प्रकार ग्राम पंचायत और निकाय चुनाव से राजनीति की एबीसीडी सीखी जाती है तो यह भी सब जानते हैं कि युवा वर्ग को छात्रसंघ चुनाव में राजनीति सीखने की पहली सीढी होती है और कितने ही छात्रनेता कॉलेजों व विवि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति के साथ ही मंत्री व अन्य पदों पर पहुंचकर देश के विकास में योगदान कर रहे हैं तो फिर छात्रसंघ चुनाव ना कराकर युवाओं को राजनीति और जरुरतमंदों की सेवा की भावना से दूर क्यों रखा जा रहा है। मेरा मानना कि जहां अभी छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए है छात्रों की सोच का फायदा देश को मिले इसके लिए चुनाव कराए जाएं और कोई अड़ंगा अटकाता है तो नौजवानों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत पीएम मोदी व सीएम योगी द्वारा बाधाओं को दूर कराकर छात्रसंघ चुनाव कराएं जाएं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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