नकल विहीन साफ सुथरे माहौल में परिक्षाएं संम्पन्न कराने तथा छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन देने हेतु बीते दिवस शुरू हुई यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडियम की परीक्षा देने पहुंचे छात्र-छात्राओं को जिले के वरिष्ठ अधिकारियों आदि ने उनका पुष्प बरसाकर स्वागत किया जो इस बात का प्रतीक है कि सरकार बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित करने तथा अच्छे माहौल में परीक्षा दिलाने के माहौल में वचनबद्ध नजर आती है लेकिन इसके बावजूद एक खबर के अनुसार १७ जिलों में ३३ हजार छात्र-छात्राओं ने छोड़ी हाईस्कूल हिन्दी की परीक्षा से जो एहसास हो रहा है वह यह है कि हम सब कुछ तो कर रहे हैं लेकिन अपने बच्चों को परिवार के प्रमुख और स्कूलों में टीचर मानसिक और भावनात्मक रूप से उनका मनोबल शायद उतना नहीं बढ़ा रहे है जितना आवश्यक है क्योंकि अगर ऐसा होता तो इतनी भारी तादाद में मात्र १७ जिलों में छात्र-छात्राएं परीक्षाएं नहीं छोड़ते और हापुड़ जनपद के थाना पिलखुवा के गांव खेड़ा निवासी किसान पप्पन तोमर की १९ वर्षीय बेटी ऋतु तोमर जो हिन्दू कन्या इंटर कालेज पिलखुवा में इंटर की छात्र थी वह गंगनहर में कूदकर आत्महत्या नहीं करती। कहने का आशय सिर्फ इतना है कि जिस तेजी से साक्षरता बढ़ाने और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के प्रयास हो रहे है अगर उस स्तर पर अंकों की बढ़ोत्तरी पर जोर न देकर तनाम मुक्त माहौल में परीक्षाएं देने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित किया जाए और यह कहते हुए कि परिणाम कुछ भी हो बिना घबराये मन लगाकर फ्री मूड में परीक्षाएं दो तो शायद न बच्चों को परीक्षाएं छोड़नी पड़े और ना आत्महत्या हों। यह बात सही है कि वर्तमान में बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर अच्छी कमाई कर रहे है जिसके लिए कई मौके पर अभिभावक पास होने और अच्छे अंक लाने के लिए प्रेशर डालते हैं अगर ऐसा न हो तो उसके अच्छे परिणाम और वर्तमान के मुकाबले परीक्षाफल भी बेहतर निकलकर आ सकते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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