देहरादून 16 फरवरी। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट इस साल 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुलेंगे। महाशिवरात्रि के अवसर पर पंचकेदार गद्दी स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में वैदिक विधि-विधान और पंचांग गणना के बाद शुभ मुहूर्त की औपचारिक घोषणा की गई। इस वर्ष कपाट वृष लग्न में खुलेंगे, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल को खुलेंगे। यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।
तिथि घोषित होते ही शासन-प्रशासन और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने यात्रा तैयारियों को तेज कर दिया है। पैदल मार्ग से बर्फ हटाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और यात्रियों के लिए सुविधाएं दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कपाट खुलने की पारंपरिक धार्मिक प्रक्रिया के तहत 18 अप्रैल को भगवान भैरवनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। परंपरा के अनुसार भैरवनाथ को धाम का क्षेत्रपाल देवता माना जाता है और उनकी पूजा के साथ ही यात्रा की औपचारिक शुरुआत होती है। इसके साथ धाम खुलने से जुड़े अनुष्ठानों की श्रृंखला प्रारंभ हो जाती है।
भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली 19 अप्रैल 2026 को शीतकालीन गद्दी स्थल उखीमठ से धाम के लिए प्रस्थान करेगी और उसी दिन फाटा पहुंचेगी। 20 अप्रैल को डोली गौरीकुंड में रात्रि विश्राम करेगी तथा 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी। डोली यात्रा के दौरान श्रद्धालु मार्ग में दर्शन करते हुए चलते हैं और इसे केदारनाथ की परंपरागत आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
डोली के धाम पहुंचने के बाद शुभ मुहूर्त में 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। कपाट खुलने से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार, रावल की पूजा और विशेष अनुष्ठान सम्पन्न किए जाते हैं, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू होते हैं। इसके साथ ही छह माह तक चलने वाली केदारनाथ यात्रा विधिवत शुरू हो जाएगी और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
कपाट खुलने की तिथि घोषणा के साथ केदारनाथ धाम के नए रावल केदार लिंग के नाम की आधिकारिक घोषणा भी की गई। रावल धाम की पूजा पद्धति, परंपराओं और धार्मिक व्यवस्थाओं के सर्वोच्च संरक्षक माने जाते हैं और उनके निर्देशन में ही कपाट खुलने से लेकर प्रमुख अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं। इस वर्ष धाम में टी गंगाधर लिंग मुख्य पुजारी का दायित्व निभाएंगे।

