शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारी अपना व्यापार और प्रतिष्ठान बचाने के लिए एडी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं। भाजपा नेता नरेंद्र राष्ट्रवादी का कहना है कि १४ फरवरी की आम सभा में व्यापार संगठनों के लोग शामिल होंगे। तो व्यापार बचाओ संघर्ष समिति की ओर से पूर्व पार्षद सतीश गर्ग का कहना है कि सभी व्यापारियों को एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ना होगा। जहंा तक इन दोनों नेताओं का मामला है इनकी बात सही है। यह भी सही है कि इस समय सभी दलों के नेताओं को सहयोग देने के लिए सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ खड़ा होना चाहिए था वो नजर नहीं आ रहा है। बीते दिनों खबर पढ़ी कि भाजपा नेताओं पर भड़के सेंट्रल मार्केट के व्यापारी। अवहेलना पर नाराजगी जतानी जरुरी है लेकिन व्यवस्थाओं को बचाने के लिए भाजपा या अन्य दलों के नेताओं पर भड़कने की बजाय व्यापार और प्रतिष्ठान बचाने पर ध्यान देना चाहिए। मेरा मानना है कि व्यापारियों को एकजुट होकर आवास विकास के अधिकारियों की बातों में ना आकर प्रशासन शासन अदालत स्तर पर प्रयास करना होगा। जब हमारी रोटी रोजी पर सवाल उठ गए हैं तो जिस समय यह निर्माण हुए उस समय के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने की बात कही जा रही है उन पर तुरंत कार्रवाई के लिए अफसरों व नेताओं से मिलकर वर्तमान आवास विकास के अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध निर्माण चल रहे हैं उनके खिलाफ इन्हें जिम्मेदार मानते हुए इनहें भी कार्रवाई के दायरे में लाना चाहिए। सभी दलों के नेताओं से संपर्क कर अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए विधानसभा लोकसभा में सवाल उठवाकर गलती माफ कर नियमों में बदलाव या छूट देकर सरकार ऐसा रास्ता निकाले जिससे व्यापारियों के प्रतिष्ठान बचे रहे। मैं समझता हूं कि जनप्रतिनिधि भी समस्याओं को जानते हैं। वो कोई ना कोई रास्ता जरुर खोजेंगे क्येांकि जब जनसमूहों की मांग पर कानूनों में बदलाव होता है और रोक भी लगती है तो व्यापारी जनप्रतिनिधि प्रयास करें तो कोई ना कोई हल निकलेगा ही क्योंकि असंभव नहीं। जहां तक मुझे लगता है सभी व्यापारियों को रालोद सांसद राजकुमार सांगवान, राज्यसभा सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, मंत्री डॉ सोमेंद्र तोमर, सपा विधायक शाहिद मंजूर व रफीक अंसारी व कैंट विधायक अमित अग्रवाल से मिलकर यह आग्रह किया जाए कि संयुक्त मांग पत्र बनाकर सीएम राज्यपाल केंद्रीय नेताओं से आग्रह किया जाए कि दुकानों के टूटने से कई परिवार बर्बाद हो जाएंगे इसलिए इन्हें बचाने का रास्ता निकाला जाए। तो शासन के कई आदेशों में लिखा जाता है कि इसे नजीर ना माना जाए तो जब नियमों के विपरीत कुछ काम हो सकते हैं तो फिर आम आदमी के हित में निर्णय क्यों नहीं हो सकता।
अधिकारियों के बारे मेें कुछ नहीं कहा जा सकता। पुराने निगार सिनेमा और दिल्ली रोड स्थित एक समाचार पत्र के बारे में जो निर्णय लिए गए थे वो नियमों के विपरीत जाकर हुए लेकिन जानकारों का कहना है कि इसमें लिख दिया गया कि इन्हें नजीर ना माना जाए। व्यापारी नेता इन्हें खोजकर न्याय की मांग करे तो सही होगा। भाजपा पर भड़कने से कुछ होने वाला नहीं है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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