नई दिल्ली, 07 फरवरी। फास्टैग वार्षिक पास को लेकर बड़ी उपलब्धि सामने आई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, लॉन्च के महज छह महीनों के भीतर फास्टैग वार्षिक पास के यूजर्स की संख्या 50 लाख के पार पहुंच गई है और अब तक 26.55 करोड़ रुपये से अधिक टोल ट्रांजैक्शन हो चुके हैं।
फास्टैग वार्षिक पास की शुरुआत 15 अगस्त 2025 को की गई थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित रूप से सफर करने वाले यात्रियों को टोल खर्च में राहत देना है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल हाईवे यात्रियों के लिए एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरी है। टोल प्लाजा स्तर पर भी दिल्ली-एनसीआर में इसका उपयोग काफी ज्यादा है। बिजवासन टोल प्लाजा पर कारों की कुल आवाजाही में से करीब 57 प्रतिशत वाहन एनुअल पास का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, दिल्ली-एनसीआर के मुंडका और सोनीपत के झिंझोली टोल प्लाजा पर लगभग 53 प्रतिशत नॉन-कॉमर्शियल वाहन वार्षिक पास से गुजर रहे हैं।
फास्टैग वार्षिक पास देशभर के करीब 1,150 टोल प्लाजा पर मान्य है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर स्थित हैं। यह पास नॉन-कॉमर्शियल के लिए है, जिनके पास वैध फास्टैग है। इसकी एकमुश्त कीमत 3,000 रुपये है और यह एक साल या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक, जो पहले हो, तब तक वैध रहता है। भुगतान के दो घंटे के भीतर पास एक्टिव हो जाता है और यह वाहन के मौजूदा फास्टैग से जुड़ा होता है। भुगतान राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप या एनएचएआई की वेबसाइट के जरिए किया जा सकता है।
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