प्रयागराज 31 जनवरी। पति-पत्नी विवाद, गुजारा भत्ते के दबाव और गिरफ्तार के डर से जुड़ा राहत भरा फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के जरिए सामने आया है। पत्नी को गुजारा भत्ता न दे पाने की स्थिति में पति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने को हाईकोर्ट ने अवैध बताया और उसे अधिकार क्षेत्र का अतिलंघन भी कहा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि यह अनुच्छेद 21 की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लघंन है। इसमें साफ कहा गया है कि बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है कि पत्नी के गुजारे भत्ते की वसूली कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है। भत्ते की वसूली के लिए परिवार न्यायालय पति की गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकती है।
न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल ने कहा कि गुजारा भत्ता की वसूली दंड प्रक्रिया संहिता, सिविल प्रक्रिया संहिता व परिवार अदालत कानून के तहत निहित प्रक्रिया अपना कर ही की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने रजनेश बनाम नेहा केस में साफ कर दिया है कि कानूनी उपबंध के तहत ही गुजारा भत्ते की वसूली की जा सकती है। वसूली के लिए किसी कानून में गिरफ्तारी वारंट जारी करने का उपबंध नहीं है।
कोर्ट ने कहा जिस व्यक्ति पर मेंटेनेंस देने की जिम्मेदारी है, उसे अपराधी नहीं माना जाना चाहिए। मेंटेनेंस के आदेशों को लागू करने में कोर्ट अपने ज्यादा उत्साह में उसकी पर्सनल गरिमा और आजादी को कुचल नहीं सकते, भले ही उन्हें यह पता चले कि कोर्ट के आदेश के बाद जानबूझकर मेंटेनेंस का बकाया नहीं दिया गया है।
कोर्ट को यह ध्यान रखना होगा कि हर व्यक्ति के साथ गरिमा से पेश आना चाहिए, जो देश के एक आजाद नागरिक के तौर पर उसके दर्जे के हिसाब से हो। प्रदेश की परिवार अदालतों द्वारा जिस तरह से गिरफ्तारी वारंट रूटीन में जारी किए जा रहे हैं, वह न सिर्फ गैर-कानूनी है, बल्कि अमानवीय भी है, क्योंकि यह उस व्यक्ति की गरिमा को कुचलता है जिसे गिरफ्तार करके कोर्ट के सामने पेश किया जाता है, जैसे कि उस पर किसी अपराध का आरोप हो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला मोहम्मद शाहजाद और शाजिया खान के बीच गुजारा भत्ता वसूली कार्यवाही की वैधता चुनौती याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। परिवार अदालत अलीगढ़ को भत्ता वसूली अर्जी पर कानून के तहत आदेश जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि कोर्ट वेतन कुर्की जैसे उपाय कर सकती है अथवा सिविल प्रक्रिया संहिता में विहित वसूली कार्यवाही अपना सकती है। हालांकि गिरफ्तारी कर वसूली नहीं की जा सकती।

