लखनऊ 31 जनवरी। लखनऊ को आध्यात्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए भव्य स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के सभी सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि राजधानी में प्रवेश करते ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत और संस्कृति की झलक दिखनी चाहिए।
एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- लखनऊ से प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, नैमिषारण्य, हस्तिनापुर, मथुरा और झांसी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर ऐसे प्रवेश द्वार विकसित किए जाएं, जो उन गंतव्यों की पौराणिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को दर्शा सकें। इन द्वारों के माध्यम से यात्रियों को राजधानी में प्रवेश करते ही उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने प्रवेश द्वारों के नाम और थीम भी स्पष्ट की। रायबरेली रोड से प्रयागराज जाने वाले मार्ग पर त्रिवेणी संगम और महाकुंभ की परंपरा को दर्शाता ‘संगम द्वार’ बनेगा। सुल्तानपुर रोड से वाराणसी मार्ग पर काशी विश्वनाथ धाम से प्रेरित ‘नंदी द्वार’ और बाराबंकी रोड से अयोध्या जाने वाले मार्ग पर भगवान श्रीराम और सूर्यवंश की परंपरा को दर्शाने वाला ‘सूर्य द्वार’ बनाया जाएगा।
इसी तरह सीतापुर रोड पर नैमिषारण्य के लिए ‘व्यास द्वार’, हरदोई रोड पर हस्तिनापुर की धर्मपरंपरा को दर्शाता ‘धर्म द्वार’, आगरा रोड पर मथुरा के लिए ‘कृष्ण द्वार’ और उन्नाव रोड पर झांसी मार्ग के लिए वीरता का प्रतीक ‘शौर्य द्वार’ स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा- सभी प्रवेश द्वारों के डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रमुखता दी जाए। पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, म्यूरल, फव्वारे, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और हरित परिदृश्य के जरिए इन द्वारों को सौंदर्यपूर्ण और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली बनाया जाए। प्रत्येक प्रवेश द्वार पर उत्तर प्रदेश का राजकीय चिन्ह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवेश द्वारों के निर्माण के लिए कॉर्पोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी के फंड का उपयोग किया जाना चाहिए. यह सुनिश्चित करें कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर समन्वय के साथ कार्यवाही की जाए.

