कानपुर 22 जनवरी। चर्चित कुशाग्र हत्याकांड में अदालत ने उसकी ट्यूशन टीचर रही रचिता वत्स, प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके साथी शिव को उम्र कैद की सजा सुनाई है। को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा है कि तीनों को आखिरी सांस तक जेल में रखा जाए।
तीनों ने फिरौती के लालच में 26 माह पहले कुशाग्र की अपहरण के बाद गला घोंटकर हत्या कर दी थी। अपर जिला जज-11 सुभाष सिंह ने फैसला सुनाते समय कहा था कि इस केस का फैसला नजीर बनेगा और कानून के विद्यार्थियों को इसका अध्ययन करना चाहिए। अदालत ने उन तमाम बिंदुओं को शामिल किया है, जिसके आधार पर फैसला सुनाते समय इसे कानून के विद्यार्थियों के लिए नजीर कहा गया था। फैसला सुनते ही जहां हत्यारे फूट-फुटकर रो पड़े, वहीं दिवंगत कुशाग्र का परिवार भी बेटे को याद कर खूब रोया।
आचार्य नगर निवासी कपड़ा कारोबारी मनीष कनोडिया के बेटे कुशाग्र जैपुरिया स्कूल में हाईस्कूल के छात्र थे। वह 30 अक्टूबर 2023 को कोचिंग गए, लेकिन लौटकर घर नहीं आए। शाम को कुशाग्र के घर स्कूटर से एक युवक ने पत्र पहुंचाया, जिसमें 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। गुमराह करने के लिए पत्र में अल्लाह हू अकबर लिखा गया था। जांच शुरू हुई तो स्कूटर फजलगंज के खोयामंडी निवासी रचिता वत्स का निकला। वह कुशाग्र को पहले ट्यूशन पढ़ाती थी।
पुलिस उसके यहां पहुंची तो वह घबरा गई और बताया कि स्कूटर उसका प्रेमी प्रभात शुक्ला ले गया है। पुलिस 31 अक्टूबर को प्रभात के दर्शनपुरवा स्थित घर पहुंची तो एक कोठरी से कुशाग्र का शव बरामद हुआ। पूछताछ में पता चला कि घटना में प्रभात के साथी दर्शनपुरवा निवासी शिवा गुप्ता ने भी मदद की थी। पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया था।
रचिता और प्रभात शादी कर फिरौती की रकम से अपना घर बसाना चाहते थे। चूंकि कुशाग्र उन्हें पहचानते थे, इसलिए तीनों ने कोठरी में ले जाकर उन्हें मार डाला। मामले में मनीष कनोडिया के चाचा संजय कनोडिया ने रायपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोर्ट में 13 जनवरी को अंतिम बहस पूरी हो गई। मंगलवार को न्यायालय ने तीनों आरोपितों को दोषी करार दिया था।

