नई दिल्ली, 22 जनवरी। घर खरीदने का सपना देख रहे लाखों लोगों के लिए बजट 2026 बड़ी राहत लेकर आ सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार केंद्रीय बजट में सरकार आर्थिक विकास को रफ्तार देने के साथ-साथ आवास क्षेत्र पर खास ध्यान देगी। खासतौर पर किफायती आवास की परिभाषा में बड़ा बदलाव संभव है, जिससे महानगरों में घर खरीदना आसान हो सकता है। लंबे समय से रियल एस्टेट सेक्टर और होम बायर्स किफायती आवास की कीमत सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जिस पर सरकार बजट के जरिए फैसला ले सकती है।
उम्मीद है इस बार वित्तमंत्री आर्थिक विकास को गति देने वाले बजट पेश करेंगी, जिसमें विनिर्माण और आवास क्षेत्र को लेकर बड़े ऐलान किए जा सकते हैं। खासकर सरकार किफायती मकान एवं फ्लैट की कीमतों संबंधी बदलाव को लेकर ऐलान कर सकती है। लंबे समय से मांग की जा रही है कि सरकार किफायती आवास से संबंधी मूल्य सीमा को बढ़ाए।
मौजूदा समय में देश में 45 लाख रुपये तक की कीमत के फ्लैट एवं आवास किफायती मकानों की श्रेणी में आते हैं। नियमों के तहत मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहर) में 60 वर्ग मीटर (करीब 645 वर्ग फुट) और गैर-मेट्रो शहरों में 90 वर्ग मीटर (करीब 968 वर्ग फुट) तक के घरों को किफायती आवास की श्रेणी में रखा गया है लेकिन बढ़ती लागत के कारण निर्माता और खरीदार किफायती आवास की सीमा को बढ़ाकर 70-90 लाख तक करने की मांग कर रहे हैं, जिससे किफायती आवास खरीदने पर कर छूट संबंधी लाभ दिया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार किफायती आवास की नई सीमा तय करती है, तो इसका सीधा फायदा उन लोगों को होगा जो पहली बार घर खरीदने की योजना बना रहे हैं। टैक्स छूट और सब्सिडी योजनाओं के दायरे में आने से उनकी ईएमआई का बोझ कम होगा और घर खरीदने का सपना हकीकत में बदल सकता है। अब सबकी निगाहें बजट 2026 पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि आने वाले समय में घर खरीदना कितना आसान होता है।
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