लखनऊ, 22 जनवरी। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के आधिकारिक आवास का नाम बदल दिया गया है। अब तक ‘राज भवन’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस आवास को ‘जन भवन’ कहा जाएगा। नया नाम तत्काल प्रभाव से सभी शासकीय और वैधानिक कार्यों में लागू होगा।राज्यपाल के आवास को अब जन भवन के नाम से जाना जाएगा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज इसकी घोषणा की। इसमें राज्यपालों के आवासों के नामकरण के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों का अनुपालन किया गया है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जिस ‘जन भवन’ में रहती हैं वह 200 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक इमारत है। सन् 1798 में नवाब आसफुद्दौला के बाद नवाब सआदत अली खां को ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने लखनऊ के तख्त पर बिठाया था। नवाब की इच्छा पर जनरल क्लाड मार्टिन ने 2.5 एकड़ भूमि पर दो मंजिला शानदार भवन बनवाया था, जिसका नाम कोठी हयात बख्श (जीवन दायिनी जगह) रखा गया।
जानकारों के मुताबिक, नवाब ने भवन को नाम तो दिया लेकिन वह या उनके खानदान का कोई भी कोठी में नहीं रहा। पहले मार्टिन ने ही अपना निवास बनाया फिर सन् 1830 के आस-पास बादशाह नसीरूद्दीन हैदर के समय कोठी में कर्नल रोबर्ट्स रहे।
मेजर जानशोर बुक अवध के चीफ कमिश्नर बनने पर भवन में रहे और उनके बाद मेजर बैंक साहब के रहने पर कोठी ‘बैंक हाउस’ कही जाने लगी। ब्रिगेडियर रसेल की देख-रेख में कोठी हायत बख्श अंग्रेजी फौज की गढ़ बनी। 18 मार्च 1857 में ब्रिटिश शासकों द्वारा कोठी हयात बख्श का विस्तार किया। 19वीं शताब्दी के अंतिम चरण में ब्रिटिश अफसरों के परिवार इसमें रहे। स्वतंत्रता के पहले कोठी हयात बख्श को यूनाइटेड प्रोविन्सेज आगरा एंड अवध के गवर्नर का सरकारी आवास बनाया गया। वर्ष 1947 में स्वतंत्रता मिलने से पहले इसमें ब्रिटिश गवर्नर और बाद में भारतीय राज्यपाल रहने लगे। स्वाधीन भारत में इस भवन को राजभवन का नाम दिया गया।
वर्तमान में 48 एकड़ में स्थापित राजभवन परिसर की लगभग 10 एकड़ भूमि पर बगीचा है। सफेद रंग के मुख्य भवन के प्रथम तल पर राज्यपाल का निजी आवास है।
राजभवन के मुख्य द्वार के सामने राज्य सरकार की शासकीय मोहर की रचना पर एक विशाल फव्वारा बनाया गया है। राजभवन के मुख्य भवन में 10 अतिथि कक्ष भी हैं, जिनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि अति विशिष्ट व्यक्तियों के ठहरने की व्यवस्था है। भवन में कुल 14 प्रवेश द्वार हैं।
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