नोएडा, 20 जनवरी। नोएडा के निर्माणाधीन मॉल के पानी से भरे गड्ढे में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में सोमवार को यूपी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटा दिया गया है। साथ ही मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई गई है।
सेक्टर-150 में शुक्रवार रात करीब 12 बजे हुए हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को पद से हटाकर प्रतिक्षारत सूची में डाल दिया गया है। प्रकरण की जांच के लिए एडीजी जोन मेरठ की अध्यक्षता में एक एसआईटी गठित की गई। एसआईटी में मंडलायुक्त मेरठ और लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर को भी शामिल किया है। एसआईटी को हादसे के कारणों, संबंधित विभागों की भूमिका, लापरवाही की जिम्मेदारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों की पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं। टीम क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था, सड़क निर्माण की गुणवत्ता, चेतावनी संकेतों की मौजूदगी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की भी जांच करेगी। एसआईटी पांच दिन में शासन को रिपोर्ट देगी। घटना को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है,किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
घटना के 24 घंटे बाद लगाए बैरिकेड
निवासियों ने बताया की घटना के 24 घंटे के अंदर आनन फानन में यहां बैरिकेड किए गए। अधिकारियों के मुताबिक जिस भूखंड में गिरकर साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत हुई है, वह एससी-02, सेक्टर-150 भूखंड है, जिसे नोएडा प्राधिकरण ने थ्री सी लोटस ग्रीन डेवलपर्स स्पोर्ट्स सिटी प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया था।
प्राधिकरण से भूखंड लेने के बाद बिल्डर ने भूखंड को 24 छोटे-छोटे हिस्सों में दूसरे बिल्डरों को बेच मुनाफा कमा लिया। अब जिस भूखंड पर यह हादसा हुआ है, यह भूखंड लोटस ग्रीन ने किस बिल्डर को बेचा था, यह जानकारी अभी तक नोएडा प्राधिकरण अधिकारियों के पास नहीं है।
हालांकि एफआइआर के मुताबिक भूखंड विजटाउन प्लानर प्राइवेट लिमिटेड के नाम है यह भूखंड एससी 02 / ए 3 है। इसका एरिया 27 हजार 185 वर्गमीटर बताया जा रहा है। यह भूखंड वाणिज्यिक है। इसमें दुकान और फूड बेवरेज की दुकानों का निर्माण किया जाना था।
प्राधिकरण के दस्तावेजों में साइट खाली और कार्य को शुरू नहीं किया गया बताया गया है। हालांकि यह भूखंड वर्ष 2016 से खाली बताया जा रहा है, जबकि निवासियों का कहना है कि यहां डबल बेसमेंट खोदा गया है। इसमें पानी भरा है। इसमें युवराज मेहता की कार गिरी और उसकी मौत हो गई।
इंजीनियर की मौत और कैलेंडर प्रकरण भारी पड़े
दस दिन पहले नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के नववर्ष 2026 के कैलेंडर में गिटार बजाते हुए फोटो छपने और फिर इंजीनियर की मौत का मामला नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम पर भारी पड़ गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को दिल्ली में थे। उन्होंने इस प्रकरण में सीईओ को तलब किया और शाम में आदेश आ गया।
रिपोर्ट : युवराज की मौत दम घुटने, हार्टअटैक से हुई
इंजीनियर युवराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सोमवार को आ गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि युवराज की मौत का कारण दम घुटना है। उनके फेफड़ों में काफी मात्रा में पानी भरा हुआ था, जिससे साबित होता है कि वह काफी देर तक पानी में डूबे रहे। डॉक्टरों का मानना है कि अत्यधिक तनाव, ठंड और लंबे समय तक मदद नहीं मिलने के कारण युवराज घबरा गया था।

