नई दिल्ली, 14 जनवरी। नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत सुनिश्चित पेंशन देने की दिशा में सरकार काम कर रही है। इसके लिए पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति एनपीएस के तहत ऐसा ढांचा तैयार करेगी, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद लोगों को नियमित और सुरक्षित पेंशन मिल सके।
सरकार ने यूपीएस की तरह एनपीएस में गारंटी वाली पेंशन दिलाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। एनपीएस खातों की देखरेख करने वाली सरकारी संस्था पेंशन कोष विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत निश्चित भुगतान के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत निश्चित पेंशन सुनिश्चित करने के लिए रूपरेखा एवं नियम तैयार करने को लेकर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है। पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण ने नैशनल पेंशन सिस्टम के तहत सुनिश्चित भुगतान का नियामकीय ढांचा विकसित करने के लिए उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। वित्त मंत्रालय के मंगलवार को जारी बयान के अनुसार इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों के लिए सेवानिवृत्ति आय सुरक्षा को मजबूत करना है।
पीएफआरडीए ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि यह पहल पेंशन नियामक अधिनियम के अनुरूप है और इसका उद्देश्य एनपीएस अंशधारकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आय को सुनिश्चित और सुरक्षित बनाना है। इस समिति का गठन ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में पीएफआरडीए का एक अहम कदम है, जिसका उद्देश्य हर नागरिक के लिए उम्रदराज होने के बाद आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना है।
यह समिति पीएफआरडीए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार एनपीएस के तहत ढांचागत व सुनिश्चित पेंशन भुगतान को सक्षम करने के लिए दिशानिर्देश और विनियम तैयार करने पर काम करेगी। यह पहल सरकार के विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। इसका उद्देश्य नागरिकों के लिए उनके सेवानिवृत्ति के बाद के वर्षों में वित्तीय स्वतंत्रता और सम्मान सुनिश्चित करना है।
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘पीएफआरडीए ने एनपीएस के तहत सुनिश्चित भुगतान का ढांचा विकसित करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन करके सेवानिवृत्ति सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है।’ बयान में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित ढांचे का उद्देश्य मार्केट से जुड़ाव कायम रखने हुए सेवानिवृत्ति के बाद की आय की अधिक निश्चितता प्रदान करना है।
इस 15 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता डॉ. एम एस साहू करेंगे। वे भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के पूर्व अध्यक्ष व संस्थापक हैं। समिति में कानून, बीमांकिक विज्ञान, फाइनैंस, बीमा, कैपिटल मार्केट और शिक्षा जगत के विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति व्यापक परामर्श के लिए बाहरी विशेषज्ञों और मध्यस्थों को भी आमंत्रित कर सकती है।
इस समिति में विधि, मूल्यांकनकर्ता, वित्त, पूंजी बाजार एवं शिक्षा जगत जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा, व्यापक विचार-विमर्श सुनिश्चित के लिए समिति को बाहरी विशेषज्ञों या मध्यस्थों को विशेष सदस्यों के तौर पर प्रतिक्रिया एवं परामर्श के लिए आमंत्रित करने का अधिकार दिया गया है। यह समिति नियमित पेंशन भुगतान पर एक स्थायी सलाहकार समिति के रूप में गठित की गई है। इसके मुख्य कार्यों में नियमों का विकास, बाजार आधारित गारंटी, परिचालन के तौर-तरीके खोजना, जोखिम और कानूनी निगरानी, अंशधारकों की सुरक्षा आदि शामिल हैं।
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