नई दिल्ली 10 जनवरी। तेहरान में ईरान सरकार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों में हिंसा बढ़ गई है। प्रदर्शन उग्र होता देख ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने का आदेश दे दिया। इस गोलीबारी में 217 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है।
दरअसल, एक स्थानीय डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर टाइम पत्रिका को बताया कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज हुई है। इसमें अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई है।
प्रदर्शनकारियों के मौत को लेकर स्थानीय डॉक्टर ने बताया कि मृतकों में अधिकतर युवा थे, जिनमें उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर मशीन गन से अंधाधुंध फायरिंग करने के दौरान मारे गए कई लोग शामिल थे। इन सभी की मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं, वाशिंगटन डीसी स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी, जो सिर्फ पहचाने गए पीड़ितों की गिनती करती है, उसने विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत से अब तक कम से कम 63 मौतों की पुष्टि की है। और 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘हाथ ईरानियों के खून से सने हैं.’ यह बयान इजरायल के साथ जून में हुए युद्ध और उसमें अमेरिकी समर्थन के संदर्भ में दिया गया. सरकारी टीवी पर प्रसारित भाषण में खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा, जबकि उनके समर्थकों ने ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगाए. खामेनेई ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य खून देकर बना है और वह दबाव में झुकने वाला नहीं है. उन्होंने यहां तक दावा किया कि ट्रंप का अंजाम भी उसी तरह होगा, जैसे 1979 में ईरान के शाह का हुआ था.
दूसरी ओर ट्रंप ने हालात को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि ईरान ‘बहुत बड़ी मुसीबत’ में है. ईरान की सरकार के लिए अच्छा ही होगा कि वह प्रदर्शनकारियों पर गोली न चलाना शुरू करे, नहीं तो अमेरिका भी गोली चलाएगा.’ ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब जमीनी सैन्य कार्रवाई नहीं होगा, लेकिन ईरान को ‘जहां दर्द होगा, वहीं चोट’ दी जाएगी. एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 86 वर्षीय खामेनेई शायद देश छोड़ने की तैयारी में हों.
प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान ने देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया है. इंटरनेट मॉनिटर नेटब्लॉक्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है. एमनेस्टी के अनुसार इंटरनेट बंद करने का मकसद हिंसा और मौतों की असली तस्वीर दुनिया से छिपाना है. नॉर्वे स्थित एनजीओ ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ ने बताया कि मरने वालों में कम से कम नौ बच्चे शामिल हैं.
गौरतलब है कि ईरान में महंगाई, गिरती मुद्रा और आर्थिक बदहाली के खिलाफ पब्लिक भड़की है और प्रदर्शन चल रहा है। यह प्रदर्शन ईरान के लगभग सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। प्रदर्शन के बीच ट्रंप की धमकी ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं। इधर ईरान ने भी सख्ती के संकेत दिए हैं।

