प्रयागराज 08 जनवरी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि मांगी गई जानकारी का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है तो उसे व्यक्तिगत माना जाएगा। ऐसे में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उसके खुलासे पर रोक रहेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति श्री अरुण कुमार की एकलपीठ ने मित्रसेन कुमार सिंह की याचिका पर दिया। मऊ निवासी याची मित्रसेन ने आरटीआई के तहत ग्राम पंचायत परसुपुर मुबारकपुर के परिवार रजिस्टर में प्रद्युम्न नामक व्यक्ति का नाम दर्ज किए जाने से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके बाद राज्य सूचना आयोग के समक्ष अपील दायर की। इस पर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के गिरीश राम चंद देश पांडेय मामले का हवाला देते हुए कहा कि मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत है। 19 सितंबर 2024 के आदेश से अपील खारिज कर दी तो याची ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सूचना आयोग के फैसले को बरकरार रखा।
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