पिथोरागढ़ 12 दिसंबर। राजाजी और कार्बेट नेशनल पार्क की तरह ही अब चीन सीमा से सटा पिथौरागढ़ जिले का अस्कोट अभयारण्य भी उत्तराखंड का नया वाइल्डलाइफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने जा रहा है। समुद्र तल से लगभग 22 हजार फीट की ऊंचाई पर 600 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले इस अभयारण्य में पर्यटक मौनाल, स्नो लैपर्ड, हिमालयन भालू का दीदार करेंगे। साथ ही करीब 250 प्रजाति के पक्षियों और प्राकृतिक नजारों को नजदीक से देख सकेंगे। बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों का अद्भुत नजारा भी यहां का मुख्य आकर्षण होगा।
भारत में चीन व नेपाल सीमा पर स्थित अस्कोट अभयारण्य 1996 में राज्य पशु कस्तूरा मृग के संरक्षण के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। इस संरक्षित क्षेत्र की ऊंचाई दो हजार से 22 हजार फीट तक है। कस्तूरी मृग यहां की सबसे बड़ी पहचान है। अब तक आदि कैलास और कैलास-मानसरोवर यात्रा मार्ग को छोड़कर अभयारण्य के शेष क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बहुत कम रही है। अनछुए इलाकों को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए वन विभाग ने इसे नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से वर्किंग प्लान तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसे पर्यटकों के लिए खोलने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।
जैवविविधता और दुर्लभ पशु-पक्षियों को देख सकेंगे पर्यटक अस्कोट अभयारण्य में पक्षियों की 250 प्रजातियों को पहचान अब तक हो चुकी है। इनमें राज्य पक्षी मोनाल, हिमालयी ग्रिफोन, काली तीतर चीयर फीजेंट, ब्लैक थ्रोटेड टिट, हिमालयी कुलफिंच, वुडपैकर ब्रेस्टेड रोजफिंच, ब्लू व्हिसलिंग थ्रैश, येलो बिल्ड ब्लू मैग्पाई आदि शामिल हैं। स्नो लेपर्ड इस अभयारण्य की शान माना जाता है। हिमालयन भालू और धार का भी यहीं निवास है। जड़ी- बूटियों से इस भरे इस अभयारण्य में सुनेर आंवला, बहेड़ा, यारणा गंधू, सालम पंजा, कुटकी, कूट, जटामासी, समेचा डोलू इसकी महत्ता और बढ़ा देते हैं। ईको टूरिज्म से सुधरंगी स्थानीय ग्रामीणों की मी आर्थिकी अस्कोट अभयारण्य के टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होने का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा। स्नो स्कीइंग, रिवर राफ्टिंग, बर्ड वाचिंग जैसी गतिविधियां भी रोजगार के अक्सर बढ़ाएंगी।
पिथौरागढ डीएफओ आशुतोष सिंह का कहना है कि अस्कोट अभयारण्य को राजाजी और कार्बेट नेशनल पार्क की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए 10 वर्षीय कार्ययोजना बनाई जा रही है। जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर इसे स्वीकृति के लिए चीफ वाइल्डलाइफ उत्तराखंड को भेजा जाएगा।

