आजादी के बाद से देश और प्रदेशों में सरकार किसी भी दल की रही हो लेकिन उसके द्वारा उपलब्ध साधनों और आर्थिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए जनहित में काम करने और नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्थाएं प्राथमिकता से करने की कोशिश की जाती रही है। वर्तमान में भी केंद्र और प्रदेश में सरकारें चला रही भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल व अन्य राजनीतिक दलों की सरकारें भी लगभग ऐसा ही हरसंभव करने की कोशिश कर रही है। इस मामले में हर वो प्रयास हमारी सरकारों द्वारा किया जा रहा है जिससे जनता का भला होता हो। विकास कार्य प्राथमिकता से हो और नागरिकों की समस्याओं का समाधान समय से हो। ऐसे में चुनावों से पूर्व अपने द्वारा की जाने वाली घोषणाओं और बयानों को पूरा करने के लिए सत्ताधारी दल जिलों के अफसरों को बजट और अन्य सुविधाओं के साथ अधिकार भी दिए जा रहे हैं।
मगर जितना देखने में आ रहा है। बजट भी रिलीज हो रहा है योजनाएं भी बन रही है और प्रस्ताव भी पास होते हैं। कार्यो के शुभारंभ भी किए जाते हैं लेकिन आम आदमी के टैक्स को बजट के माध्मय से सरकार विभागों को दे रही है उससे होने वाले कामों में लापरवाही भ्रष्टाचार तो नहीं हो रहा वो गुणवत्ता से हो रहे है या नहीं यह शायद नहीं देखा जा रहा तभी आजतक गडढा मुक्त सड़कें नहीं हुई। प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। कानून व्यवस्था बनने और भयमुक्त वातावरण आम आदमी के अनुसार नहीं हो पा रहा है तो आखिर सरकार के संकल्प और पीएम और सीएम की भावनाओं से जुड़ी व्यवस्थाएं कैसे पूरी हो यह सोचने का समय आ गया है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सरकार ने बीती चार अक्टूबर को आपका पैसा आपका अधिकार राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया जिसके तहत शेयर म्यूचल फंड और बैंक खातों में पड़ी लावारिस संपत्तियों को उनके दावेदारों तक पहुंचाने के लिए पीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकारी निकायों के करीब दो हजार करोड़ रूपये पहले ही उनके सही मालिकों को लौटाए जा चुके है। अक्टूबर से पांच दिसंबर तक ४७७ जिलों में शिविर लगाए गए जिनमें जनप्रतिनिधियों जिला प्रशासन और वित्तीय संस्थाओं के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पीएम का कहना है कि आपका पैसा आपका अधिकार आंदोलन में हिस्सा ले। हम इस आंदोलन को आने वाले समय में और व्यापक बनाएंगे। उनका कहना था कि बीमा कंपनियों के पास करीब १४ हजार करोड़ रूपये की राशि बिना दावे केपड़ी है। दूसरी तरफ बैंकों में भी बेहिसाब धनराशि वापस करने के बाद भी हितधारको को आगे लाने और विकास कार्यों को कराने के लिए पीएम के आह्वान आपका पैसा आपका अधिकार को आत्मसात कर जनप्रतिनिधि व जागरूक नागरिक सक्रिय होकर अधिकारों के लिए प्रयास करने की जरूरत है। समय से जनप्रतिनिधियों को यह सोचकर कि जनता का पैसा और सरकार की आर्थिक सहायता का लाभ सबको मिले और भ्रष्ट अधिकारियों के बैंक बैलेंस बढ़ने का कारण ना बने इसके लिए आगे आकर काम करना चाहिए और प्रधानमंत्री द्वारा इस बारे में आह़्वान किया जा चुका है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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