बैंगलुरू, 29 अगस्त (ता)। कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने गत दिवस मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि कथित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले को लेकर चल रहे विवाद से कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना न करना पड़े, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। बेंगलुरु के विधान सौधा में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेंद्र भावुक नजर आए। उन्होंने खुद को निर्दाेष बताते हुए कहा कि विपक्ष ने उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया है।
नागेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुझे कहा कि मैं हर स्तर पर निर्दाेष हूं। उन्होंने कहा कि मुझे इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। लेकिन पार्टी को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए मैं स्वेच्छा से अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप रहा हूं। उन्होंने मीडिया के उन प्रतिनिधियों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने उनका समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने जानबूझकर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दी। भाजपा मनुस्मृति की सोच को लागू करना चाहती है, जबकि देश संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों से चलता है। यह शास्त्रों का युग नहीं है। यह संविधान और बाबा साहेब आंबेडकर का युग है। उन्होंने रामायण के शंबूक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के दौर में इस तरह के भेदभाव की कोई जगह नहीं है, क्योंकि संविधान वंचित समुदायों को अधिकार देता है। भाजपा की सोच है कि दलित, आदिवासी, महिलाएं, शूद्र और अल्पसंख्यक स्वतंत्र रूप से आगे न बढ़ें और सत्ता में भागीदारी न करें। विपक्ष ने विधानसभा में उचित चर्चा के बिना उनसे इस्तीफे की मांग की। उन्होंने दावा किया कि सूखा, कावेरी जल विवाद, केपीएससी भर्ती विवाद और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी क्योंकि सदन की कार्यवाही बाधित की गई। उन्होंने भाजपा की प्रस्तावित पदयात्रा की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह वाल्मीकि निगम मामले को घोटाले के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जबकि उनका इसमें कोई रोल नहीं है । नागेंद्र ने अपने बचाव में कहा कि मामले में कई जांच हो चुकी हैं। मैं यह बात कई बार कह चुका हूं। 2024 में भी मैंने पार्टी को असहज स्थिति से बचाने के लिए इस्तीफे की पेशकश की थी। उसके बाद हर तरह की जांच हुई। भाजपा सीआईडी और एसआईटी का मजाक उड़ाती है, लेकिन हमें अपनी एसआईटी पर गर्व है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार किया था और वह तीन महीने जेल में रहे, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली। क्या मैंने कहीं कोई हस्ताक्षर किए? क्या मैंने कोई आदेश जारी किया? क्या मेरे पास से एक रुपया भी बरामद हुआ ? नागेंद्र ने कहा कि उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आता है। मुझे ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या इसलिए कि मैं दलित या आदिवासी हूं? उन्होंने राज्यपाल के उस फैसले पर भी सवाल उठाया जिसमें उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई।
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