पुलिस ज्यादती से जुड़े एक मामले की जांच से पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। २०२५ में पुलिस से जुड़े एक मामले को लेकर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक वीडियो के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी की छवि को खराब नहीं किया जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका कर्ता से पूछा था कि क्या केवल एक वीडियो में अधिकारी महिला को थप्पड़ मारते हुए नजर आए। उनका कहना था कि पूरे मामले का निष्कर्ष निकालना जरुरी है। खबर पढ़कर कहा जा सकता है कि अदालत का दृष्टिकोण सही है क्योंकि किसी चित्र या वीडियो को देखकर किसी की छवि खराब करने का अधिकार किसी को नहीं है जब तक वह दोषी ना ठहरा दिया जाए। पिछले कुछ सालों में अदालत ने ऐसे कई याचिकाकर्ताओं को सही रास्ता दिखाया जो सस्ता व सुलभ न्याय दिलाने के नियमों को तोड़मरोड़क कुछ लोग सक्रियहो जाते हैं और सफलता मिल गई तो अधिकारियों व जनता पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। यही से बेकसूर लोगों का उत्पीड़न शुरु हो जाताहै जिसे सही नहीं कहा जा सकता। गलत इरादे से याचिका दायर करने वालों पर जुर्माना लगाकर उनसे यह अधिकार छीन लिया जाए या कुछ समय के लिए पाबंदी लगादी जाए क्योंकि किसी अफसरों की छवि खराब किया जाना ठीक नहीं है। नागरिकों की इस मांग से मैं भी सहमत हूं कि इस प्रकार की याचिका डालने वालों को रोकने के लिए इसे अपराध की संज्ञा दी जाए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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