हर व्यक्ति को साक्षर बनाने के प्रति जिस प्रकार से अभिभावकों की अभिलाषाएं बढ़ रही है उसका निजी स्कूल संचालक दोनों हाथों से धन बटोरने और शिक्षा की दुकान चलाने में लगे ही हैं। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी जो मोटा वेतन और सुविधाएं लेतेहैं उनके द्वारा बरती जा रही लापरवाही ने आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर बजट का इतना बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च होने के बाद भी सुधार क्यों नहीं हो रहा है। क्योंकि आए दिन स्कूल प्रशासन बच्चों को धोखे या लापरवाही से कक्षाओं में बंद कर चले जाते हैँ। तो दूसरी तरफ एक सरकारी स्कूल सरयू नदी में समा जाने और जब आगरा शहर में एक ऐसा इंटर कॉलेज सामने आया जिसमें कभी ८०० बच्चे होते थे लेकिन अब संख्या 11 ही रह गई लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि ११ बच्चों के लिए ११ शिक्षक तैनातहैं। अब आप समझ सकते हैं कि 11 शिक्षकों और मैनेजमेंट के नाम पर अन्य के ऊपर कितना धन खर्च होता होगा। शिक्षा के नाम पर धन की बर्बादी इस विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता उजागर करती है। बताते हैँ कि जाट हाउस राजा की मंडी स्थित इस स्कूल में पिछले १५ साल से बिजली की व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी और पंखे की व्यवस्था भी नहीं बताई जाती है। सवाल यह उठता है कि हमारी सरकार इंग्लिश मीडियम स्कूलों की बराबरी के लिए प्रयासरत हैं और शिक्षक उसे मिटाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं क्योंकि मूलभूत साुविधाए ं भी इसमें नहीं है तो मिड डे मील व अन्य का क्या होता होगा। बीएसए का कहना है कि हम निरीक्षण करेंगे। कमियां मिलने पर कार्रवाई की जाएंगी। डीआईओएस रविंद्र पाल तोमर जी अगर आप शहर के बीच में स्थित स्कूल पर भी नजर नहीं रख सकते तो आपक्या कर रहे हैँ। मेरा मानना है कि कार्यवाहक प्रधानाचार्या सीमा सिंह व डीआईओएस को सस्पेंड किया जाए कि उन्होंने सुधार के प्रयास क्यों नहीं किए। सरकारी स्कूलों में लापरवाही इससे भी उजागर होगी है कि मेरठ में कैंट बोर्ड द्वारा संचालित सीएवी इंटर कॉलेज में सरकारी किताबों के स्थान पर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबे लिए जाने का दबाव बनाया जा रहा है। हाल बेहाल बेसिक व इंटर कॉलेजों का ही नहीं है आज एक खबर पढ़ने को मिली कि नेपाल के त्रिभुवन विवि से अनुबंधित चार कॉलेजों का अनुबंध विवि ने समाप्त कर यूजीसी को पत्र भेजकर जानकारी दी और इसके आधार पर ११४ विद्यार्थियों की पीएचडी की डिग्री रद कर दी गई। जिसमें मणिपुर के ९८ छात्रों की डिग्री रद हुई। त्रिभुवन ने सीएमजे विवि मेघालय टेक्नो गलोबल विवि विदिषा मध्य प्रदेश और शंघाई विवि मणिपुर व प्रज्ञान विवि झारखंड के अनुबंध रर किए हैं। त्रिभुवन विवि के निदेशक रामेकृष्ण तिवारी के अनुसार भारतीय युनिवर्सिटी की अनुबंध से जुड़ी शिकायत मिली थी। इस आधार पर यूजीसी के सहयोग से जांच कराई गई।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- ओडीओसी व्यंजनों की पैकेजिंग एवं शेल्फ लाइफ पर हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
- बिना जांचें परखे किसी की भी छवि खराब करना बने अपराध
- उत्तर प्रदेश में 15 आईपीएस अधिकारियों का तबादला
- प्राइमरी स्कूल से लेकर इंटर और विवि तक में खस्ताहाल शिक्षा और बच्चों का मानसिक, अभिभावकों का आर्थिक उत्पीड़न जारी है सरकारी बजट की बर्बादी
- कॉकरोच आंदोलन से विपक्ष हुआ मजबूत, प्रियंका में नजर आ रही है इंदिरा की छवि
- पंजाब में कोई भी पेपर लीक नहीं हुआ : भगवंत मान
- शिवालयों में सात और रास्तों पर ट्रिपल लेयर सुरक्षा प्लानिंग लागू, एटीएस तैनात
- सुप्रीम कोर्ट की शर्त मंजूर नहीं
