मेरठ, 27 जुलाई (प्र)। देश में असुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण के लिए बनी योजनाओं के उल्लंघन की बढ़ती प्रवृति से जहां सरकार की जनहित की योजनाओं को उल्लंघन हो रहा है तो आम आदमी को भी उसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जिम्मेदार अफसर कुछ करने को तैयार नहीं और नेता लगभग खामोश हैं। ऐसा क्यों है यह तो वहीं जान सकते हैं। मगर जब सरकार के नियम नीतियों को लागू कराने और आम आदमी को परेशानियों सेबचाने के लिए मीडिया द्वारा इनके खिलाफ खबरों से आवाज बुलंद की जाती है तो अवैध निर्माण करने वालों के परिवार के लोग और परिचित खबरों पर कमेंट करते हैं कि मीडिया वाले विकास नहीं होने देना चाहते। कोई अच्छा काम शहर में होता है तो उसका विरोध करते हैं। बड़े बड़े व्यवसाय और होटल आ रहे हैं तो उनसे शहर खुशहाल हो रहा है और यह इमारतों को तुड़वाने या कर्ता को धमकाने दबाव बनाकर पैसे लेने केलिए खबरें लिखते हैं। मैं किसी के कमेंट या कुछ कहने का विरोध नहीं कर रहा हूं क्योंकि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन टिप्पणी करने वाले यह समझ लें कि अगर निर्माणकर्ता सरकारी नीतियों का पालन नहीं करेंगे और अफसरों से मिलीभगत आम आदमी के अधिकारेों पर कुठाराघात करेंगे तो गलत काम करने वालों के समर्थक कितनी ही टिप्पणी कर लें जनहित में शांत बैठने वाले नहीं है।
इसके उदाहरण में सिविल लाइन क्षेत्र में राजलोक के पास हुए एक अवैध निर्माण जिसमें फर्जी तरीके से बिना एनओसी रिहायशी बिल्डिंग में कारीगरी होटल जिम और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खुल गए हैं का मानचित्र के विपरित अवैध निर्माण किया गया। अब लाखों रुपये माह किराया वसूला जा रहा है। हम यह नहीं कहते कि मानचित्र पास नहीं कराया होगा लेकिन मानचित्र के हिसाब से निर्माण नहीं किया। इसके निर्माण में १४ हरे पेड़ भी काटे गए बताए जाते हेैं बेसमेंट भी बनाया गया और अगर नक्शा पास है तो जानकारों के अनुसारा सारा निर्माण अवैध है क्योंकि रिहायशी भूमि पर कॉमर्शियल निर्माण है। अब ऐसे जनविरोधी काम करने वालों को इस बात से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि नई चीजें लाकर विकास की बात कर रहे हैं।कारीगरी होटल की इमारत के समर्थन में कमेंट करने वालों से आग्रह है कि वह इमारत की जांच अफसरों से कराएं सच सामने आ जाएगा। माहौल बनाने से गलत काम को सही नहीं ठहराया जा सकता। निर्माण अगर सही है तो इसका पूर्णता प्रमाण पत्र लिया जाए क्योंकि बताया जा रहा है कि इसमें फर्जी एनओजी लगाई गई है और भगवान ना करे दिल्ली व लखनऊ जैसी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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