मेरठ 24 जुलाई (प्र)।आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी 25 तारीख को देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होने जा रहा है। मान्यतानुसार, इस दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर चार महीनों के लिए विराम लग जाएगा।
ज्योतिषचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार 20 नवंबर को देवप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी पर भगवान विष्णु के निंद्रा से जागने के साथ ही चातुर्मास का समापन होगा। शास्त्रों में चातुर्मास के इन चार महीनों को अत्यंत पवित्र माना गया है। यह समय उत्सवों का न होकर आत्म-संयम, पूजा-पाठ, दान-पुण्य, जप और तप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
चातुर्मास का वैज्ञानिक कारण
विभोर इंदुसुत के अनुसार सनातन संस्कृति में चातुर्मास के दौरान विवाह और मांगलिक कार्यों पर रोक लगाने के पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि एक सटीक वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी है। संधिकाल व ऋतु परिवर्तन: चातुर्मास के दौरान मौसम और ऋतु में बड़ा बदलाव (संधिकाल) होता है। वर्षा ऋतु के कारण वातावरण में नमी और सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं, जिससे मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और बीमारियों का खतरा रहता है।
25 जुलाई को रखा जाएगा एकादशी का व्रत
ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता के अनुसार 25 जुलाई से चातुर्मास शुरु होंगे। इस चार मास के समय सृष्टि का संचालन भगवान शिव के अधीन रहता है। इस काल मे सब मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं। इस दौरान एकादशी भी आएगी, जो 24 जुलाई को सुबह 9:13 बजे पर आरंभ होकर 25 जुलाई को पूर्वाह्न 11:00 बजे तक रहेगी। इसलिए उदय तिथि के अनुसार व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा। वहीं ज्योतिषचार्य रुचि कपूर के अनुसार देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास शुरु है।
28 जुलाई शाम 5:51 बजे से गुरु पूर्णिमा की पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी, जो 29 जुलाई रात 7:23 बजे तक रहेगी. इसके बाद श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी और 30 जुलाई से सावन मास का शुभारंभ माना जाएगा.
रवि और यायीजय योग का बनेगा दुर्लभ संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष हरि शयनी एकादशी पर रवि योग और यायीजय योग का विशेष संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में इंद्रियों पर नियंत्रण, जप, तप, व्रत और आध्यात्मिक साधना का विशेष फल प्राप्त होता है. साधु-संत भी चातुर्मास में एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं.

