हैदराबाद, 24 जुलाई (ता)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (केटीआर) ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को कानूनी नोटिस भेजकर 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। केटीआर का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने उन्हें ग्लोब एरिना टेक्नोलॉजीज का ‘बेनामी’ मालिक बताते हुए कई निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाए हैं। गत दिवस जारी बयान में केटीआर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने बिना किसी सबूत के गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका ग्लोब एरिना टेक्नोलॉजीज से किसी भी प्रकार का स्वामित्व, वित्तीय, व्यावसायिक या अन्य कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को 48 घंटे के भीतर अपने आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने के लिए कहा गया है। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगनी होगी। अन्यथा उनके खिलाफ मानहानि सहित दीवानी और आपराधिक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। केटीआर ने मुख्यमंत्री के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि ग्लोब एरिना उनकी बेनामी कंपनी है, उन्होंने कंपनी को सीबीएसई परीक्षा से जुड़े ठेके दिलवाए या उनका कंपनी में कोई वित्तीय हित है। उन्होंने इन सभी आरोपों को झूठा, मनगढ़ंत और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के सर्वाेच्च संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री का बिना किसी तथ्य के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। मुख्यमंत्री की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए केटीआर ने कहा कि यदि ग्लोब एरिना वास्तव में उनकी बेनामी कंपनी है, तो फिर कांग्रेस सरकार ने उसी कंपनी के साथ अनुबंध क्यों किए। उन्होंने कहा, ष्आपकी ही सरकार ने इस कंपनी के साथ समझौते किए और अब आप उसे मेरी बेनामी कंपनी बता रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री को इस तरह के आरोप लगाने से पहले अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं होना चाहिए?
केटीआर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के असली मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है और देशभर के छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेने से भी बच रहे हैं और केंद्र सरकार से सवाल पूछने के बजाय राजनीतिक नाटक कर रहे हैं। केटीआर ने कांग्रेस और भाजपा के बीच अंदरूनी समझौते का आरोप लगाते हुए कहा कि रेवंत रेड्डी पुराने मामलों के दोबारा खुलने के डर से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री केंद्र सरकार से एएमआरयूटी परियोजनाओं और अन्य ठेकों में लाभ लेने के लिए समझौता कर रहे हैं। यही वजह है कि सिंगरेनी को लेकर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी केंद्र सरकार चुप है। कांग्रेस नेताओं की जांच की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए केटीआर ने कहा कि वे सीआईडी, सीबीआई, एसआईटी या किसी भी जांच एजेंसी का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या राज्य सरकार रेवंत रेड्डी के परिवार, सृजन रेड्डी प्रकरण, सिंगरेनी घोटाले और एएमआरयूटी परियोजनाओं से जुड़े आरोपों की भी एसआईटी या सीआईडी जांच कराने को तैयार है।
केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को सार्वजनिक रूप से लाइव लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा, ष्हम दोनों को जनता के सामने बैठाकर लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया जाए। मेरा ग्लोब एरिना से कोई संबंध नहीं है। साथ ही सिंगरेनी, एएमआरयूटी परियोजनाओं और अन्य भ्रष्टाचार के आरोपों की भी सच्चाई सामने आनी चाहिए। फैसला जनता करेगी कि सच कौन बोल रहा है।
केटीआर ने मुख्यमंत्री से 48 घंटे के भीतर अपने बयान वापस लेने, बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और भविष्य में इस तरह के मानहानिकारक आरोप लगाने से परहेज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर वे अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री के खिलाफ दीवानी और आपराधिक अदालतों में मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
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