नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में दो वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य भारतीय घायल हो गए हैं। घायलों में दो की हालत गंभीर बताई गई है।
घटना के बाद भारत ने नई दिल्ली स्थित ईरान के उप-राजदूत (डीसीएम) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। वहीं, जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई की।
युद्ध शुरू होने की आशंका
ईरान ने भी जार्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों का दावा किया। दोनों पक्षों के बीच घमासान से नाजुक युद्धविराम समझौता खतरे में पड़ गया है और फिर से युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमत भी नौ प्रतिशत उछलकर 86 डालर प्रति बैरल के पार चली गई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल बहिया और मोम्बासा नामक जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। अल बहिया पर हुए हमले में एक भारतीय की मौत हो गई और एक अन्य घायल हुआ, जबकि मोम्बासा पर नौ भारतीय घायल हुए, जिनमें दो की हालत नाजुक है।
जवाबी हमले की चेतावनी
अल बहिया पर 12, जबकि मोम्बासा पर 18 भारतीय नाविक सवार थे। विदेश मंत्रालय ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। यूएई स्थित भारतीय दूतावास प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है। यूएई ने ईरान को जवाबी हमले की चेतावनी भी दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, विशेषकर होर्मुज खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने तथा संवाद और कूटनीति के माध्यम से स्थिति सामान्य करने की अपील की। विगत कुछ हफ्तों में पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी कई बार व्यावसायिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के मुद्दे को उठाया है।
अब तक 13 भारतीयों की मौत
मार्च 2026 से जारी इस संघर्ष में अब तक 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन भारतीय अब भी लापता हैं। पिछले 48 घंटे में तीन भारतीय नागरिकों की जान गई है। इससे पहले जून में अमेरिकी हवाई हमले में एक वाणिज्यिक जहाज पर सवार तीन भारतीयों की भी मौत हुई थी, जिसके बाद भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी अधिकारियों को बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। फ्रांस में पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया था।
ट्रंप की 20% टैक्स की धमकी
इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को सैन्य अभियान की औपचारिक जानकारी देने के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू करने की घोषणा की है। इससे पहले ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के आवागमन की जिम्मेदारी संभालेगा और सुरक्षा प्रदान करने के एवज में 20 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा।
हालांकि, भारत ने इसका विरोध किया है। वहीं ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने ट्रंप के इस फैसले को डकैती बताया है। वहीं, क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत लगातार अपने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है।
फारस की खाड़ी में फंसे हैं भारत के सात जहाज
प्रेट्र के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच फारस की खाड़ी में भारत के ध्वज वाले सात जहाज मौजूद हैं। एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि इन जहाजों पर कुल 148 भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें से पांच जहाज व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हैं। मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए ये जहाज फिलहाल फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की योजना नहीं बना रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बाद ही इनके सुरक्षित आवागमन पर फैसला लिया जाएगा।

