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    Home»देश»नैनीताल में दिखी उड़ने वाली दुर्लभ गिलहरी, वनकर्मियों ने किया रेस्क्यू
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    नैनीताल में दिखी उड़ने वाली दुर्लभ गिलहरी, वनकर्मियों ने किया रेस्क्यू

    adminBy adminJuly 11, 2026No Comments4 Views
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    नैनीताल 11 जुलाई। दुर्लभ रात्रिचर इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल (गिलहरी) नैनीताल में देखी गई है। वन कर्मियों ने इसे रेस्क्यू कर लिया। रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज के एक गांव में शुक्रवार को गिलहरी एक ग्रामीण के घर में घुस गई। इसके बाद कोसी रेंज के रेस्क्यू एक्सपर्ट आशीष कश्यप व राजेश कश्यप को सूचना दी। दोनों ने घर के भीतर से गिलहरी को रेस्क्यू कर लिया।

    गिलहरी की वनकर्मियों ने डिटेल खंगाली तो वह जायंट फ्लाइंग स्क्विरल प्रजाति की पाई गई। इससे पूर्व इस प्रजाति की गिलहरी को 2014 में ढिकुली- गिरिजा क्षेत्र में पहली बार देखा गया था। यह गिलहरी उड़ती नहीं है, बल्कि अपने पैरों के बीच मौजूद पेटागियम नामक त्वचा की झिल्ली की मदद से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक करीब 60 मीटर हवा में ग्लाइडिंग कर सकती है।

    बताते चले कि उत्तराखंड वन अनुसंधान केंद्र के सर्वेक्षण में प्रदेश के 13 फारेस्ट डिवीजनों में से 18 जगहों पर यह गिलहरी देखी गई है, जबकि IUCN की रेड लिस्ट में वूली गिलहरी 70 साल पहले विलुप्त मान ली गई थी. हालांकि देहरादून वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के साइटिंस्ट ने भागीरथ घाटी में इसके होने की बात कही है और इसके दुर्लभ फोटो भी मिले हैं.

    यह गिलहरी ज्यादातर ओक, देवदार और शीशम के पेड़ों पर अपने घोंसले बनाती हैं. सुनहरे, भूरे और स्याह रंग में उड़न गिलहरियां देखी गई हैं. कोटद्वार के लैंसडोन में 30-50 सेंटीमीटर लंबी उड़न गिलहरी भी देखी गई है. गले पर धारी होने के कारण स्थानीय लोग पट्टा बाघ भी इनको कहते हैं. पहले इन गिलहरियां की तादात ज्यादा थी लेकिन कटते जंगल और ग्लोबल वार्मिंग के चलते इनकी तादात कम होने लगी है. अब ये वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के शेड्यूल-2 में दर्ज हैं.
    अपने पंजों के फर को पैराशूट की तरह इस्तेमाल करके ये 400 से 500 मीटर मीटर तक ग्लाइड कर सकती हैं. इन गिलहरियों पर शोध करने वाले ज्योति प्रकाश बताते हैं कि 10 से 12 दिन तक जंगल में इनका घोंसला खोजने में लग गए. फिर 7 से 8 दिन लगातार कैमरा ट्रैप लगाने के बाद उड़न गिलहरी की कुछ फोटो और वीडियो मिल पाए हैं.

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