मेरठ 19 जून (प्र)। रूबी खान और नासर की नियुक्ति, मूल्यांकन में खामी, अनावश्यक निर्माण कार्य सहित विभिन्न मामलों में गुरुवार को छात्रों ने कॉकरोच का मुखौटा पहनकर कुलपति दफ्तर पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय देने की मांग भी की। छात्रों ने कहा कि जब तक सिस्टम की सफाई नहीं होती, कॉकरोच कैंपस में जिंदा रहेंगे।
छात्र कॉकरोच का मुखौटा पहनकर और हाथों में तख्ती लेकर कुलपति दफ्तर पर पहुंचे और बाहर धरने पर बैठ गए। एडवोकेट आदेश प्रधान ने कहा कि विवि में लंबे समय से विभिन्न पदों पर विवादित नियुक्ति, वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक मनमानी एवं छात्रों को दरकिनार करने जैसी स्थितियां हैं। कैंपस में रूबी खान और नासर की गलत तरीके से नियुक्ति की गई और उन्होंने विवि में एक दिन काम नहीं किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि मीना की सेलरी गलत तरीके से उसके खाते में भेजी गई। कैंपस में बिना मानचित्र पास हुए निर्माण हो रहे हैं।
अनुज भड़ाना एवं शशिकान्त गौतम ने कहा कि विवि प्रशासन को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। आकाश भड़ाना, शुभम उपाध्याय, शान मोहम्मद ने विवि में स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की। रविन्द्र प्रधान, शेखर, अक्षय सिंह, अरुण पाल ने मूल्यांकन में अनियमितता के आरोप लगाए। छात्रों ने दावा कि कैंपस में बाहरी एवं अराजक तत्वों का आवागमन बढ़ गया है और वे छात्राओं पर छींटाकसी करते हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों पर लिखित और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो विश्वविद्यालय परिसर में एक दिवसीय सत्याग्रह किया जाएगा।
छात्रों के अनुसार उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं बल्कि विवि में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रहित की रक्षा करना है। छात्र आखिर में कुलपति ऑफिस गेट पर ज्ञापन चस्पा कर लौट आए। इस मौके पर आकाश भड़ाना, अरुण पाल, शेरा जाट, हैप्पी चपराना, संदीप गौतम, युधिष्ठिर भाटी, तस्लीम, अवनीश पंवार, शुभम उपाध्याय, हरीश, अनिकेत, इरफान, नितिन गर्ग, फुरकान, दीपक शर्मा, दक्ष पुरी, वरुण सिंह, अजय त्यागी मौजूद रहे।
सीसीएसयू प्रेस प्रवक्ता प्रो.मुकेश शर्मा का कहना है कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं इनमें कोई सत्यता नहीं है। पहले भी इस तरह के आरोप लगाए गए थे, लेकिन कोई सत्यता नहीं निकली। मूल्यांकन सही है। जो मामले सामने आए थे उसमें परीक्षक की त्रुटि निकली और उन्हें नोटिस दिया जा चुका है। विवि में जो भी कार्य हो रहे हैं वह नियम संगत और संबंधित संस्थाओं के निर्धारित मानक एवं अनुमति से हो रहे हैं। आरोप बेबुनियाद हैं और विवि की छवि को खराब करने वाले हैं।

