Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई भी शुल्क, सरकार ने कर दिया क्लियर
    • 70 की उम्र में भी प्रमोद कुमार साइकिल पर ला रहे कांवड़
    • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुभाष चंद्र त्यागी की विशेष अपील की खारिज
    • बिजनौर सांसद चंदन चौहान ने की दौराला-हस्तिनापुर-बिजनौर रेल लाइन निर्माण की मांग
    • मूर्ति पूजा को बड़ा अपराध बताने वाले मुफ्ती पर मुकदमा दर्ज
    • आतंकवाद खत्म होने पर ही पाकिस्तान से संबंध : जयशंकर
    • कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की धूम, नहीं हुआ कसाना डीजे व न्यू अमर डीजे का मुकाबला
    • सीएम योगी ने कांवड़ियों पर की पुष्प वर्षा, हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा माहौल
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»मई में थोक महंगाई बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई
    देश

    मई में थोक महंगाई बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 16, 2026No Comments4 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली, 16 जून (ता)। मई में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26% पर थी। मई में महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 जून को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और फ्यूल के दाम बढ़ना है। इसके अलावा अनाज और तेल भी महंगा हुआ है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच साढ़े तीन महीने से तनाव है। स्थितियां सामान्य नहीं हुईं तो महंगाई और बढ़ सकती है।
    थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है।
    जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।
    भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।
    महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

    business Desh New Delhi tazza khabar tazza khabar in hindi Wholesale inflation rose to 9.68% in May.
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    websitemarketing2019@gmail.com
    • Website

    Related Posts

    UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई भी शुल्क, सरकार ने कर दिया क्लियर

    August 8, 2026

    70 की उम्र में भी प्रमोद कुमार साइकिल पर ला रहे कांवड़

    August 8, 2026

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुभाष चंद्र त्यागी की विशेष अपील की खारिज

    August 8, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.