मेरठ, 11 जून (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। शादी विवाह समारोह और शुभ कार्य वर्ष में कुछ दिनों के लिए कई कारणों से रूक जाते है और कुछ समय उपरांत दोबारा से संगीत की मधुर धुनें सुनने तथा बधाई और शुभकामनाएं देने वालों का सिलसिला शुरू हो जाता है। प्रिय पाठकों के लिए अब शादियों की शहनाई और बैंड बाजों की आवाज में झूमने तथा स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद लेने और भरपेट अच्छा भोजन करने का वक्त आ गया है। इसलिए जिस किसी के यहां भी रिश्तेदारी या मिलने वालों में वैवाहिक शहनाई बजने वाली हो वह अपनी सुविधा के लिए कपड़े सिलवाने और शगुन का लिफाफा तैयार रखे। क्योंकि एक खबर के अनुसार 15 जून को अधिकमास समाप्त होने के बाद 17 जून से विवाह और मांगलिक कार्यक्रम आरंभ हो जाएंगे। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार जून और जुलाई में विवाह के लिए दोनों महीनों को मिलाकर केवल 17 दिन ही विवाह के शुभ मुहूर्त हैं।
अमावस्या 15 जून को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12ः20 बजे से प्रारंभ होकर 15 जून को प्रातः 8ः24 बजे तक रहेगी। 14 जून को रोहिणी नक्षत्र का योग रहेगा। जबकि 15 जून को मृगशिरा नक्षत्र के साथ सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग का संयोग बनेगा। इसके अतिरिक्त 11 जून को अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी मनाई जाएगी। इसे परमा, पुरुषोत्तमी अथवा कमला एकादशी के नाम से जाना। 1 जुलाई से आषाढ़ माह का आरंभ हो जाएगा। परंपरागत रूप से आषाढ़ में विवाह के मुहूर्त सीमित रहते हैं। इस वर्ष आषाढ़ में 1, 2, 6, 7 और 8 जुलाई को ही प्रमुख विवाह लग्न हैं। जबकि 11 जुलाई का मुहूर्त अल्प अवधि का होने के कारण अपेक्षाकृत कम प्रभावी माना जा रहा है। वत्स ने कहा कि ज्येष्ठ अधिकमास की जाता है।
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के चौप्टर अध्यक्ष आचार्य मनीष स्वामी ने कहा कि इस वर्ष 17 मई से प्रारंभ हुए ज्येष्ठ अधिकमास (मलमास) के कारण विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य स्थगित रहे। अधिकमास 15 जून तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन एवं अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। अब 17 जून से यह कार्य आरंभ हो जाएंगे।
इस हिसाब से नियमानुसार वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए दो माह में 17 मुहूर्त निकल रहे बताये जाते हैं लेकिन यह नही है कि सिर्फ वैवाहिक शहनाई इन्हीं दिनों में बजेगी क्योंकि अब तो हर वर्ग के धर्म को मानने वाले भी सुविधा और समय तथा आवश्यकतानुसार पंडित जी से मुहूर्त निकलवाकर बेटे-बेटियों की शादी करा देते हैं इसके अलावा जो कोर्ट मैरिज करते हैं उनके लिए तो दिन और मुहूर्त का कोई रोक नहीं है क्योंकि जिस दिन विवाह कराने वाले अधिकारी समय दे देते हैं उनके लिए तो वहीं दिन शुभ हो जाता है।

