भोपाल/नई दिल्ली, 10 जून (ता)। मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को तब बड़ा झटका लगा, जब पार्टी प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज कर दिया गया। उन पर हलफनामे में आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप है। इस पर भड़की कांग्रेस ने इसे सीट चोरी बताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
महासचिव केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में गत दिवस नई दिल्ली में आयोग के दफ्तर पहुंचे कांग्रेस नेताओं की तुरंत सुनवाई न होने पर उन्होंने बाहर धरना दे दिया। अब पार्टी के प्रतिनिधि मंडल की बुधवार को शीर्ष चुनाव अधिकारियों से मुलाकात हो सकती है। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है। मीनाक्षी का परचा खारिज होने के बाद अब तीनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशी ही मैदान में रह गए हैं। यह मामला तब गरमाया, जब तीसरी सीट से भाजपा प्रत्याशी महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि मीनाक्षी ने तेलंगाना में अपने खिलाफ दर्ज मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है।
केवट के वकील संकेत गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के साफ दिशा-निर्देश के बावजूद मीनाक्षी ने
हलफनामे में तेलंगाना के केस का जिक्र नहीं किया है, हलफनामे में ऐसी हर जानकारी देना जरूरी है। ऐसे में जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने उनका परचा रद्द कर दिया। उन्होंने दावा किया कि मीनाक्षी के परचे में कई अन्य कमियां भी पाई गईं।
लोकतंत्र को कुचलना मकसद
मीनाक्षी का आरोप है कि भाजपा संविधान व लोकतंत्र को कुचलने के लिए राजनीति कर रही हैं। यह सिर्फ एक सीट का मामला नहीं है, यह भारत के विचार व लोकतंत्र के लिए व्यापक संघर्ष का मामला है। मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी ने दावा किया, मीनाक्षी पर कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है। कोर्ट से सिर्फ नोटिस
मिला था, इसका जिक्र जरूरी नहीं था।
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