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    Home»न्यूज़»वरिष्ठ अफसरों की भ्रष्टाचार में जवाबदेही तय हो : कोर्ट
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    वरिष्ठ अफसरों की भ्रष्टाचार में जवाबदेही तय हो : कोर्ट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 5, 2026No Comments3 Views
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    प्रयागराज, 05 जून (ता)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री से अफसरशाही में जवाबदेही तय करने के लिए ‘सुपीरियर रिस्पांसबिलिटी’( उच्च जिम्मेदारी) का सिद्धांत अपनाने की अपेक्षा की है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने कोर्ट ने कहा है कि समय आ गया है जब वरिष्ठ अफसरों को उनके अधीनस्थों की गलती के लिए आपराधिक तौर पर भी जिम्मेदार ठहराया जाए।
    बरेली निवासी व्यवसायी अवनीश कुमार अग्रवाल की याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश का वह आदेश निरस्त कर दिया है जिसमें दो एफआईआर के चलते पासपोर्ट के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किए जाने से इन्कार कर दिया गया था। कोर्ट ने अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है।
    क्षेत्रीय पासपोर्ट प्राधिकरण बरेली को निर्देश दिया है कि वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार याची के पक्ष में पासपोर्ट जारी/नवीनीकृत करें। मुख्य सचिव से कहा है कि वह आदेश को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करें। कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि आरोप बहुत गंभीर हैं, लेकिन पीठ ने कई सवाल उठाए।
    पीठ ने मनीष कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में हाई कोर्ट के 2023 के आदेश का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी वाली एफआईआर की जांच की निगरानी के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाए तथा सरकारी विभागों की ओर से दर्ज प्राथमिकी की जांच चरणबद्ध ढंग से जल्दी पूरी की जाए। राज्य सरकार का कहना था कि हाई कोर्ट के 29 नवंबर 2023 के आदेश के अनुपालन में नौ दिसंबर 2025 को उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है। इसमें मुख्य सचिव अध्यक्ष हैं जबकि अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव गृह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधि परामर्शी, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिदेशक अभियोजन सदस्य। इस क्रम में मंडल व जिला स्तरीय कमेटियां भी हैं।
    कोर्ट ने तथ्यों पर विचार करने के बाद पाया कि मनीष कुमार सिंह केस में दिए गए निर्देशों का अनुपालन विलंबित और आंशिक रहा है। कहा कि उसके पास मुख्य सचिव को तलब करने, व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर जुर्माना लगाने, अफसरों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी कर कैडर कंट्रोलिंग अथारिटी को भेजना जैसे विकल्प हैं, लेकिन वह राज्य और उसकी संस्थाओं के हित में अभी इन विकल्पों का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। कोर्ट को उम्मीद है कि अफसर खुद प्रभावी तंत्र बनाकर नीतियों को लागू करेंगे। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह सेना में कमांड रिस्पांसबिलिटी होती है, उसी तरह अब सचिव, विभागाध्यक्ष और अन्य शीर्ष अफसरों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि नीचे क्या हो रहा है? यदि वरिष्ठ अफसर अपने अधीनस्थों के भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, रिकार्ड दबाने, सरकारी आदेशों की अवहेलना को रोकने या दंडित करने में नाकाम रहते हैं तो उनका दायित्व तय होना चाहिए। उनको विफलता के लिए आपराधिक रूप से भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। संस्थागत पतन के दो अलग-अलग रूपों के प्रति किया आगाह पीठ ने संस्थागत पतन के दो अलग अलग रूपों के प्रति आगाह किया। कहा, एक मन का भ्रष्टाचार है जिसके तहत निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को जानबूझकर विकृत किया जाता है। साथ ही पैसे का भ्रष्टाचार है, जिसके तहत सार्वजनिक पद को व्यक्तिगत आर्थिक लाभ का जरिया बना लिया जाता है। याची का कहना था कि एक एफआईआर में जांच लगभग दो दशकों से लंबित है। दूसरी एफआईआर में 18 वर्षों की देरी के बाद वर्ष 2024 में आरोप-पत्र दाखिल किया गया। हाई कोर्ट की एक कोआर्डिनेट बेंच ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही पर पहले ही रोक लगा दी थी। याची के खिलाफ 18 साल पहले वाणिज्य कर अफसरों के साथ मिलकर दस्तावेज जलवाने के आरोप में बिजनौर के नजीबाबाद व मंडावली थाने में एफआइआर दर्ज की गई थी।

    Accountability of senior officers for corruption must be fixed: Court Court Order prayagraj tazza khabar tazza khabar in hindi Uttar Pradesh
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