हापुड़ 25 मई। जेठ (ज्येष्ठ) महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ‘गंगा दशहरा’ मनाया जाता है. पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थी. इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के सभी ज्ञात-अज्ञात पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.
ज्येष्ठ गंगा दशहरा पर जनपद हापुड़ के गढ़ क्षेत्र की तीर्थ नगरी ब्रजघाट में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. देर रात से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो दिनभर जारी रहा. लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की और हर-हर गंगे के जयकारों से पूरा ब्रजघाट गूंज उठा. गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्थाएं संभालते नजर आए. दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान समेत उत्तर प्रदेश के कई जनपदों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद घाटों पर पूजा-पाठ और हवन किया.
डीएम कविता मीना और एसपी ज्ञानंजय सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारियों ने ब्रजघाट पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने घाटों पर तैनात पुलिसकर्मियों और संबंधित विभागों को सतर्क रहकर ड्यूटी करने के निर्देश दिए. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों पर बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सहायता की भी व्यवस्था की गई.
गंगा दशहरा पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का ब्रजघाट पहुंचना देर रात से ही शुरू हो गया. सुबह होने तक घाटों और आसपास के मार्गों पर भारी भीड़ लगी. परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालु भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच घाटों की ओर बढ़ते नजर आए.
श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद घाटों पर पूजा-पाठ, हवन और दान-पुण्य किया. कई श्रद्धालु परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठान करते दिखाई दिए. घाटों पर पंडितों के मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.
भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए घाटों, पार्किंग स्थलों और प्रमुख मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा. महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिसकर्मियों को भी अलग-अलग घाटों पर लगाया गया.
श्रद्धालु करते हैं दीपदान
दशहरा शब्द का अर्थ है दस प्रकार के पापों का हरण। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान, जप और पूजा करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसलिए हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी और गंगासागर जैसे तीर्थस्थलों पर लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए उमड़ते हैं। श्रद्धालु दीपदान करते हैं, गंगा आरती में भाग लेते हैं और मां गंगा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

