कई बार देखने और पढ़ने सुनने को मिलता हेै कि कुछ लोग धर्म के नाम पर राष्ट्रगीतों व प्रार्थनाओं का खुलकर विरोध करते हैं। उनके इस आचरण से देश की एकता से संबंध इन गीतों का तो कुछ नहीं बिगड़ता लेकिन जिन लोगों की भावनाएं इनसे जुड़ी रहती है वो अपने आप को अपमानित जरुर महसूस करते हैं। राष्ट्रगीतों के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं लेकिन अब वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला वंदे मातरम का अपमान दंडनीय घोषित महत्वपूर्ण है और मुझे लगता है कि इसका पालन भी सभी से कराना चाहिए क्योंकि विरोध करने वाले कुछ ऐसे काम भी करते हैं जो धर्म में मान्य नहीं है। मेरा मानना है कि वंदे मातरम जन गण मण सरस्वती वंदना ऐसे गीत और प्रार्थनाएं है जो किसी धर्म को लेकर पूर्ण नहीं है। वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत है और जन गण मण राष्ट्रगान है सरस्वती वंदना ज्ञान प्राप्त करने वाले हर व्यक्ति के लिए है और जब हम इस सरस्वती वंदना के सार स्वीकारते हैंं तो प्रार्थना में क्या बुराई है। हर बात को धर्म से जोड़ना वर्तमान समय में नहीं है। भारत में सर्वधर्म सदभाव की भवना अनुकरणीय है और हर जगह दिखाई भी देती है। हिदु मुस्लिम सिख ईसाई आपस में भाई की भवनाओं को साकार करने में हम पीछे नहीं रहते और सभी को अपने धर्म के हिसाब से पूजा करने की छूट है तो राष्ट्रगान व राष्ट्रीय गीत सबको मान्य क्यों नहीं होता।
भारत रत्न बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर द्वारा जो संविधान की रचना की गई उसे सभी धर्मों व वर्गो के लोग नतमस्तक होकर मानते हैं जब संविधान सबके लिए एक है तो राष्ट्रभक्ति सभी में परिपूर्ण है और ऐसे उदाहरण देखने को मिलतेहैं कि कुरीतियों के खिलफ अभियान चलाए जा रहे हैं और ना मानने पर क्या कार्रवाई हो सकती है ऐसी खबरें भी पढ़ने को मिलती है। जब हम हर क्षेत्र में सुधार की भावना को आत्मसात कर रहे हैं तो देशक्ति सर्वहित है। मुझे लगता है कि वंदे मातरम का अपमान दंडनीय अपराध होगा जैसे निर्णय की आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए क्योंकि सभी देशों में नागरिकों द्वारा नीतियां व बातें ऐसी होती है जो सभी मानते हैं उसका विरोध नहीं किया जाता तो इन गीतों व प्रार्थना का विरोध क्यों। मुझे लगता है कि सभी धर्मों को मानने वालों को इस बारे में विचार कर विवाद ना हो कि किसी को सजा मिले इसे ध्यान में रखकर जागरुकता लाने के प्रयास हो तो सबके हित में है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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