मेरठ 09 मई (प्र)। शास्त्री नगर के चर्चित सेंट्रल मार्केट प्रकरण में अब वह दौर शुरू होने जा रहा है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलने के बाद अब जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। आवास एवं विकास परिषद की आंतरिक जांच में 139 अधिकारी और कर्मचारी अवैध निर्माण कराने, संरक्षण देने या नियमों की अनदेखी करने के आरोप में दोषी पाए गए हैं। परिषद प्रशासन ने इनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली है और इसकी पुष्टि भी हो चुकी है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 25 अक्टूबर, 2025 को भूखंड संख्या 661/6 पर बने 22 दुकानों वाले कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त किया गया था। यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी थी। इसके बाद लखनऊ मुख्यालय की ओर से सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में अवैध निमाणों की व्यापक जांच शुरू कराई गई। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिनमें विभागीय मिलीभगत की बात भी उजागर हुई। परिषद के डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर अनिल सिंह, अधीक्षण अभियंता राहुल यादव, अधिशासी अभियंता अभिषेक राज, सस्मित कटियार समेत आदि अफसरों की अगुवाई में शास्त्री नगर क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया। अब तक 44 संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई करते हुए नोटिस चस्पा किए जा चुके हैं। वहीं आवास एवं विकास परिषद की ओर से कुल 860 अवैध निर्माणों पर कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। हालांकि, इस कार्रवाई का व्यापारियों और भवन स्वामियों ने कई बार विरोध भी किया, लेकिन प्रशासनिक सख्ती और भारी पुलिस बंदोबस्त के चलते विरोध असरदार नहीं हो सका।
अधिकारियों का कहना था कि मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा होने के कारण किसी भी स्तर पर ढिलाई संभव नहीं थी। ध्वस्तीकरण के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा था कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कैसे खड़े हो गए। इसके बाद परिषद प्रशासन ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच बैठाई, जो वर्षों तक इस क्षेत्र में तैनात रहे। जांच रिपोर्ट में 139 नाम सामने आए हैं। इन पर नियमों के विपरीत निर्माण को बढ़ावा देने, शिकायतों को दबाने और कार्रवाई न करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध पाए गए हैं।
139 की सूची में नामजद 67 अधिकारी भी शामिल
शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट अवैध निर्माण प्रकरण में अब कार्रवाई का दायरा और बड़ा होता दिखाई दे रहा है। आवास एवं विकास परिषद की जांच में जिन 139 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें नौचंदी थाने में पहले से मुकदमे में नामजद 67 अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे साफ हो गया है कि विभागीय जांच और पुलिस कार्रवाई दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। अवैध निर्माण प्रकरण में नियमों की अनदेखी कर निर्माण कराने, संरक्षण देने और समय रहते कार्रवाई न करने के आरोप में कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इसी आधार पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता आफताब अहमद की ओर से नौचंदी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। मुकदमे में अवर अभियंता से लेकर सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता स्तर तक के अधिकारियों को नामजद किया गया था। नामजद अधिकारियों में राम अवतार मित्तल, मनोहर कुमार, एके जैन, आरके वर्मा, एसके वर्मा, वीके अग्रवाल, उमेश मित्तल, देवेन्द्र कुमार, अरविन्द कुमार समेत कई वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल हैं।
नाम गोपनीय, लेकिन कार्रवाई तय
परिषद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर दिए हैं। हालांकि, अभी नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि कार्रवाई की सूची में वर्तमान और पूर्व दोनों तरह के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। कार्रवाई के बाद सभी के नाम उजागर किया जा सकते हैं आवास एवं विकास परिषद प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि दोषियों पर विभागीय कार्रवाई जल्द शुरू होगी। इसमें निलंबन, सेवा अभिलेख में प्रतिकूल प्रविष्टि, पदावनति और अन्य कठोर विभागीय दंड शामिल हो सकते हैं।

