नयी दिल्ली, 30 जनवरी। जोधपुर की केंद्रीय जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गत दिवस उच्चतम न्यायालय में उन आरोपों का खंडन किया कि उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ की तरह सरकार को उखाड़ फेंकने वाला बयान दिया था। कार्यकर्ता ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें आलोचना और विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष यह तर्क दिया कि पुलिस ने हिरासत में भेजने वाले प्राधिकारी को गुमराह करने के लिए चुनिंदा वीडियो का सहारा लिया है।
सिब्बल ने पीठ को बताया, “वीडियो देखिए। पुलिस के मुताबिक, वह कह रहे हैं कि अगर भारत सरकार राज्य का दर्जा नहीं देगी, तो वह अरब स्प्रिंग की तरह सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। वह ऐसा नहीं कह रहे हैं। मैं (वीडियो को) लिपिबद्ध कर दूंगा।”
अरब स्प्रिंग सरकार विरोधी प्रदर्शनों, विद्रोहों और सशस्त्र बगावत की एक शृंखला है जो लगभग 2010 और 2018 के बीच पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में फैल गई थी। सिब्बल ने इस बात का भी खंडन किया कि वांगचुक ने एक साक्षात्कार में कहा था कि अगर सरकार मदद नहीं करेगी तो लद्दाख के लोग युद्ध के दौरान भारतीय सेना की मदद नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि गलत, यही इस मामले की समस्या है। उन्होंने हिरासत में भेजने वाले प्राधिकारियों को गुमराह किया है। मेरे पास उस वीडियो का लिंक है जिसमें वह सरकार और प्रधानमंत्री की प्रशंसा कर रहे हैं; वीडियो में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। वरिष्ठ वकील ने कहा कि किसी ने उन्हें (वांगचुक को) बताया कि कारगिल कश्मीर में विलय होना चाहता है। उन्होंने कहा कि ठीक है, अगर वे शामिल होना चाहते हैं, तो वे शामिल हो सकते हैं।’ इसमें जनमत संग्रह से संबंधित कुछ भी नहीं है। सिब्बल ने वांगचुक के खिलाफ लगे उन आरोपों का भी खंडन किया कि उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी की थी और कहा कि किसी आईटी सेल ने इसे गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने कहा कि असंपादित संस्करण से पूरी तस्वीर सामने आती है। इसका मतलब यह था कि कश्मीर से लद्दाख को मुक्त कराने के बाद, केंद्र सरकार (संविधान की) छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही। उनका कहना है कि जिस तरह राम ने सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाकर बाजार में छोड़ दिया था, ठीक वैसा ही काम केंद्र सरकार ने लद्दाख के साथ किया।”
सिब्बल ने कहा कि उन्होंने राम के बारे में एक प्रतीकात्मक बयान दिया। अगर इन बयानों के आधार पर किसी को हिरासत में लिया जाता है, तो बेहतर होगा कि हम बोलना ही बंद कर दें। उनकी पत्नी एक हिंदू हैं। वरिष्ठ वकील ने कहा कि लद्दाख एक ऐसी जगह है जहां प्रकृति को संरक्षित किया जाना चाहिए। सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है और दो फरवरी को जारी रहेगी।
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