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    Home»देश»कटऑफ घटाने से डाक्टरों की काबिलियत पर असर नहीं
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    कटऑफ घटाने से डाक्टरों की काबिलियत पर असर नहीं

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comFebruary 24, 2026No Comments1 Views
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    नई दिल्ली, 24 फरवरी। भारत में डॉक्टरी करने के बाद एमडी, एमएस और पीजी डिप्लोमा सीटों के लिए नीट पीजी परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस बार पीजी की हजारों सीटें खाली रहने के चलते कटऑफ में काफी ज्यादा कमी कर दी गई। इसके चलते तीसरे राउंड की काउंसलिंग में 800 में से 100 से कम नंबर लाने वालों को भी सीट मिल गई। अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बारे में विचार किया जाएगा कि क्या वाकई नीट पीजी 2025-26 के लिए कटऑफ में कमी से मेडिकल एजुकेशन की क्वालिटी पर असर पड़ेगा। इसे लेकर सरकार की तरफ से भी तर्क दिया गया है।
    इसी बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि नीट पीजी का मकसद किसी छात्र की न्यूनतम डॉक्टर के रूप में योग्यता तय करना नहीं है। सरकार के अनुसार, डॉक्टर बनने की असली पात्रता एमबीबीएस की पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करने के साथ ही साबित हो जाती है। नीट पीजी केवल एक प्रवेश परीक्षा है, जिसका उद्देश्य सीमित पोस्टग्रेजुएट (एमडी, एमएस) सीटों के लिए उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट तैयार करना है।
    सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी कटऑफ मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि क्या कट-ऑफ बहुत कम करने से मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी खराब होगी? सरकार को यह साबित करना होगा कि इससे पढ़ाई के स्तर पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी माना कि नीट-पीजी और नीट-यूजी (एमबीबीएस के लिए) में अंतर है। पीजी में शामिल होने वाले छात्र पहले से ही डॉक्टर (एमबीबीएस) होते हैं, इसलिए यह मामला थोड़ा अलग है।
    सरकार की तरफ से पेश हुए वकील एएसजी ऐश्वर्या भाटी अपना तर्क रखते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हर साल कई सीटें खाली रह जाती हैं, इसलिए कट-ऑफ कम करना पड़ता है, ताकि सीटें भरी जा सकें. नीट-पीजी सिर्फ एक रैंक लिस्ट है। इसका मकसद यह चेक करना नहीं है कि डॉक्टर काबिल है या नहीं, क्योंकि वे पहले से ही डॉक्टर हैं। इसका मकसद उपलब्ध सीटों के लिए डॉक्टरों के बीच एक मेरिट लिस्ट तैयार करना है। सरकार ने कहा कि 2017 से ही सीटें भरने के लिए कट-ऑफ कम की जाती रही है। 2023 में तो इसे घटाकर ‘जीरो’ तक कर दिया गया था।
    याचिकाकर्ताओं ने ‘नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज’ (एनबीईएमएस) की तरफ से 13 जनवरी को जारी किये गए नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें नीट-पीजी 2025-26 के तीसरे दौर की काउंसलिंग के लिए कट-ऑफ को कम कर दिया गया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक ने मामले में दाखिल किये गए अपने हलफनामे में कहा कि याचिकाकर्ताओं की तरफ से दी गई चुनौती राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम 2019 के तहत सक्षम वैधानिक प्राधिकारों द्वारा जनहित में और विशेषज्ञ संबंधी विनियमन के दायरे में लिये गए एक शैक्षणिक और नीतिगत निर्णय से संबंधित है।

    Desh New Delhi Reducing the cutoff does not affect the ability of doctors. supreme-court tazza khabar tazza khabar in hindi
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