प्रयागराज 28 जनवरी। किन्नर अखाड़ा से महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को बाहर कर दिया गया है. इसकी पुष्टि अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने की है. बताया जा रहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर टिप्पणी करने को लेकर उनपर ये कार्रवाई की गई है.
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रो. डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने यामाई ममता नंद गिरी उर्फ ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया है. उन्हें अखाड़े के सभी दायित्वों से भी मुक्त कर दिया है. गौरतलब है कि महाकुंभ 2025 में 24 जनवरी को ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े ने नया नाम यामाई ममता नंद गिरी देकर महामंडलेश्वर बनाया था. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता कुलकर्णी के बयानों से असहमति जताते हुए खुद को अलग करते हुए यह कार्रवाई की है.
किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर जो बयान ममता कुलकर्णी ने दिया है वह उनका व्यक्तिगत बयान है. इस मुद्दे पर उन्होंने किन्नर अखाड़े से कोई विचार विमर्श नहीं किया है. उन्होंने कहा है कि संन्यास परंपरा में हमारे गुरु श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरी महाराज हैं. जबकि हमने दीक्षा शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती से ली है.
उन्होंने यह भी कहा कि हमारे गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और ब्रह्मलीन स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के बीच कोर्ट में विवाद भी चल रहा था. लेकिन इसके बावजूद उन बातों पर हमें कोई टिप्पणी नहीं करनी है. किन्नर अखाड़ा इन सभी विवादों से पूरी तरह से दूर है.
ममता कुलकर्णी ने कहा- मैंने महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दिया है। वास्तव में महामंडलेश्वर का पद कई साल के आध्यात्मिक अभ्यास और तपस्या से हासिल किया जाता है। मैंने देखा है कि सच्चा महंत या महामंडलेश्वर बनने के लिए कई साल तक ध्यान, तपस्या और आध्यात्मिक अनुशासन से गुजरना पड़ता है।
मैं अभी भी काफी कठोर हूं। अभी मुझे इन सबसे मुक्त होना है। इतना सब कुछ चल रहा है। शंकराचार्य को ही देखो, उनको अहंकार हो गया है। उन्होंने कहा था कि राम मंदिर अधूरा है। 500 साल बाद जब राम मंदिर बन रहा था, तो सबने मंदिर का वेलकम किया। केवल शंकराचार्य ने नहीं किया था। उसका संकेत आदिशक्ति ने उनको तुंरत दिया था। उसी समय ज्योतिष्मठ में लैंडस्लाइड हुआ था। जैसे हम लोग बोलते हैं न कि बंदर का बैठना और डाली का टूटना, ऐसा हो गया था। मुझे बहुत-सी चीजों को ज्ञान है। मैं सब नहीं बता सकती।
ममता को अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखाने के 3 घंटे के अंदर सनातनी किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां ने कहा- हम लोग शुरू से ममता कुलकर्णी का विरोध कर रहे थे, अखाड़े में गलत लोगों को लाने के पहले ही सोचना चाहिए था। टीना मां ने आगे कहा- अब बहुत देरी हो चुकी है, हम कभी उस अखाड़ें में वापस नहीं जाएंगे।

