परिवार के पालन पोषण और समाज में बने रहने का मुख्य अंग व्यापार अथवा रोजी रोटी का माध्यम किसी का भी प्रभावित नहीं होना चाहिए। लेकिन यह भी जरूरी है कि आम आदमी आवागमन सुचारू रूप से उपलब्ध हो वरना सारी व्यवस्थाएं गड़बड़ा सकती हैं।
गढ़ रोड पर पुलिया बन रही है। सड़क बननी है। चौड़ीकरण भी होना है तो उसके लिए रास्ते भी बंद होंगे। आवागमन भी प्रभावित होगा। यह सब काम तय समयानुसार निपटे यह सबसे जरूरी है। लेकिन इसकी योजना और नीति तथा नक्शा किसने बनाया वो अलग बात है लेकिन जिस प्रकार से यहां बीच सड़क पर लंबा चौडा डिवाइडर बनाया जा रहा है उसकी कतई भी आवश्यकता नहीं थी। यहां सड़क की चौडाई बनने और यातायात सुगम बनाने के लिए दो फुट चौड़ा डिवाइडर भी मार्ग की सुंदरता और चौड़ाई बनाए रखता। लेकिन पता नहीं हमारे कर्णधारों को क्या होता जा रहा है कि ऐसी धींगामुश्ती की योजनाएं लागू करने के मामले में जनप्रतिनिधि बोलते नहीं और व्यापारियों की कोई सुनने को तैयार नहीं है। यह तो अच्छा है कि कोई न्यायालय का द्वार नहीं खटखटा रहा वरना बेगमपुल से अंबाला बस स्टैंड तक लगभग दो दशक पूर्व बनाया गया डिवाइडर हरियाली के नाम पर स्टे आने से ना तो वहां हरियाली हो पाई ना वहां डिवाइडर ही काम कर पाया था। इसलिए हमारे जनप्रतिनिधियों को आगे आकर इस डिवाइडर की चौड़ाई आवागमन सुलभ बनाने के लिए कम कराने का प्रयास करना चाहिए।
अब जहां तक गढ़ रोड की बदहाली से मंडप कारोबार चौपट और बुकिंग रद होने की खबरें हैं तो विवाह मंडप वालों को भी सोचना होगा कि जब इनके यहां शादी समारोह होते हेैं तो आवागमन या तो लगभग चौपट हो जाता है या रेंग रेंगकर मंडपों के सामने वाहन चलते हैं जिससे आम आदमी के समय पेट्रोल डीजल की बर्बादी और मानसिक उत्पीड़न होता है। अकेले नागरिकों के अनुसार मनोज गुप्ता के इस सड़क पर राधा गोविंद और ला फ्लोरा मंडप तथा राम कुमार रानू सतसंगी व नवीन मित्तल डेरे वाले द्वारा बनाया गया वोल्गा मंडप हैं। जानकारों का कहना है कि इनका निर्माण पूर्णतया अवैध और सरकार की निर्माण नीति के विपरीत हैं। लेकिन उसमें सुधार करने की बजाय नागरिकों की परेशानियों पर ध्यान उनके द्वारा नहीं दिया जाता। ऐसा ही कुछ इस रोड पर काली नदी के आगे तक ज्यादातर विवाह मंडप अवैध रूप से बने बताए जाते हैं। इनके संचालकों को अपने मंडपों की बदहाली के साथ साथ नागरिकों की समस्याएं जो इनके कारण उत्पन्न होती है उनके समाधान की बात भी करनी चाहिए। बताते हैं कि जो नियमानुसार निर्माण करने पर सरकार को राजस्व मिलता वो भी नहीं मिला। विवाह मंडप संचालक दोनों हाथों से नागरिकों के अनुसार माल कमाते हैं। अब कुछ दिनों की जो परेशानी हो रही है उससे उन्हें ऐसी व्यवस्था भी करनी चाहिए कि उनके कारण नागरिक भी परेशान ना हो। इसलिए वो अपने विवाह मंडप अगर रोड से थोड़ा पीछे कर नियमानुसार संचालित करें और पार्किंग सुचारू की जाए तो कुछ लोगों का मानना है कि परेशानी तो जरूर होगी लेकिन आयोजन हो सकते हैं बुकिंग रद नहीं करनी पड़ेगी अगर यह थोड़ी व्यवस्था अपनी तरफ से अवैध निर्माण हटाने की करेंगे तो।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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