हापुड़ के मोनार्ड विवि में पकड़े गए फर्जीवाड़े के बाद से इसे लेकर आए दिन खबरें पढ़ने सुनने को मिलती है। सरकार ने जांच टीम गठित की है जिसमें फर्जी डिग्री बनाने और बेचने की जांच की जा रही है। एसटीएफ की जांच में सबसे ज्यादा फर्जी डिग्री बिहार छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के युवाओं को बेचे जाने की बात सामने आ रही है। इनमें एक लाख से ज्यादा डिगिं्रया बेची गई। बताते हैं कि इनका रेट जरूरत के हिसाब से तय होता था। कुछ डिग्रियों के दस लाख में दिए जाने की बात सामने आ रही है।
मोनार्ड और ऐसी विवि की देशभर में चर्चाएं हैं। मगर कई बार यह सुनने को मिलता है प्राइवेट विवि लोगों को गलत तरीके से पीएचडी बांट रही है या एडमिशन फर्जी कागजों पर लिए जा रहे हैं। ऐसे अनेको बिंदु सुनने को मिलते हैं। कुछ माह पूर्व एक चर्चा सुनी कि मेरठ में मवाना रोड स्थित एक अवैध कॉलोनाइजर को एक विवि द्वारा फर्जी तरीके से डॉक्टरेट की डिग्री दी गई। ऐसे अनेको मामले निजी विवि के खुलकर सामने आ सकते हैं ऐसा नागरिकों का कहना रहा है। मेरा मानना है कि केंद्र प्रदेश सरकारों को ईमानदार लोगों की कमेटी बनानी चाहिए जो मीडिया में ऐसी कोई खबर मिले तो उन मामलों का खुद संज्ञान लेकर जांच करे तो नागरिकों के अनुसार देश की कई विवि जो बड़े लोगों को बुलाकर अपना प्रचार कर रही है उनका भी पर्दाफाश हो सकता है। शिक्षा मंत्रालय को यह भी तय करना चाहिए कि जो विवि विदेशी विवि से करार करती हैं उनका स्तर क्या है उनकी जानकारी भी आम आदमी को दी जाए ऐसे निर्देश हर विवि संचालक को दिए जाएं जिससे अभिभावक तय कर सकें कि उसका स्तर क्या है और उसमें पढ़ने वाले बच्चों का क्या लाभ होगा।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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