नई दिल्ली, 18 फरवरी। दिल्ली सरकार जल्द ही ईवी पॉलिसी 2.0 लागू करने की तैयारी में है, जिसे केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य चार्जिंग नेटवर्क का तेज विस्तार, ज्यादा सब्सिडी और 2028 तक हजारों इलेक्ट्रिक बसों का सड़क पर लाना है। केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने के लिए बड़ा वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना में 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और तैनाती के लिए 4,391 रुपये करोड़ निर्धारित किए गए हैं, ताकि राज्यों में सार्वजनिक परिवहन को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक में बदला जा सके। इसके साथ ही देशभर में ईवी अपनाने को आसान बनाने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दो हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशनों का जाल मजबूत हो सके।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों को सुनिश्चित करने के लिए टेस्टिंग एजेंसियों के मॉडरेशन और अपग्रेडेशन पर 780 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसका उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि ईवी से जुड़े उपकरण, बैटरी और वाहन भारतीय मानकों के अनुरूप हों और उपभोक्ताओं को सुरक्षित व विश्वसनीय विकल्प मिल सके।
दिल्ली सरकार 47 किलोमीटर लंबे आउटर रिंग रोड दिल्ली पर हर पांच किमी पर फास्ट-चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य चालकों में रेंज एंग्जायटी कम करना और लंबी दूरी के सफर को आसान बनाना है। फिलहाल राजधानी में 8,998 चार्जिंग पॉइंट हैं, जबकि आवश्यकता 36,177 की आंकी गई है। वर्ष के अंत तक यह संख्या 16,070 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
दिल्ली सरकार की योजना है कि वह अपने सब्सिडी पोर्टल को केंद्र के साथ सिंक कर दे।
दोपहिया वाहन: केंद्र ( पीएम ई-ड्राइव) जहां दस हजार रुपये तक की छूट दे रहा है, वहीं दिल्ली सरकार प्रति वाहन 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दे सकती है।
तिपहिया वाहन: यहां तो जैकपॉट जैसा है। केंद्र से 50 हजार रुपये और राज्य से 30 हजार की फ्लैट सब्सिडी मिलकर इलेक्ट्रिक ऑटो को बेहद किफायती बना देगी।
अब सब्सिडी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। शोरूम पर आधार के जरिए तुरंत वेरिफिकेशन हो जाएगा, लेकिन इसमें कुछ शर्तें भी लागू हैं। जैसे वाहन रजिस्टर्ड होना चाहिए। दोपहिया की एक्स-फैक्टरी कीमत 1.5 लाख से कम हो और एल 5 तिपहिया पांच लाख रुपये सीमा के भीतर हो।
हालांकि दिल्ली सरकार पहले से ई-दोपहिया पर 5,000 रुपये प्रति ॉी (अधिकतम 30,000 रुपये), ई-तिपहिया पर 30 हजार रुपये फ्लैट सब्सिडी दे रही है। दोनों योजनाओं के संयोजन से खरीदारों को अधिक वित्तीय राहत मिल सकती है।
ईवी पॉलिसी 2.0 का केंद्रीय उद्देश्य दिल्ली की पूरी सार्वजनिक बस सेवा को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक में परिवर्तित करना है। तय रोडमैप के अनुसार 31 मार्च 2026 तक 6,000 ई-बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी। इसके बाद अगले साल ये संख्या बढ़ाकर 7,500 की जाएगी। योजना के तीसरे चरण में 31 मार्च 2028 तक कुल 10,400 इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य रखा गया है, और अंत में इसे बढ़ाकर 14,000 ई-बसों तक पहुंचाने की तैयारी है।
ये परिवर्तन केवल फ्लीट विस्तार नहीं है, बल्कि शहरी परिवहन ढांचे में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन देती हैं, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके साथ ही परिचालन लागत में लंबे समय तक बचत की भी उम्मीद है। कम शोर प्रदूषण और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसे लाभ भी मिलेंगे। इस तरह ईवी पॉलिसी 2.0 दिल्ली को स्वच्छ, सतत और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की ओर ले जाने की रणनीतिक पहल मानी जा रही है।
नई ईवी पॉलिसी 2.0 में सिर्फ नए इलेक्ट्रिक वाहन बेचने पर ही जोर नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को टिकाऊ बनाने की योजना शामिल है। इसके तहत पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए स्क्रैपिंग प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे लोग पुराने वाहन छोड़कर नए ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हों। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के सुरक्षित निपटान और रीसाइक्लिंग के लिए अलग तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
नीति में ये भी सुनिश्चित करने की तैयारी है कि बाजार में पर्याप्त संख्या में ईवी उपलब्ध हों, ताकि मांग और आपूर्ति में असंतुलन न हो। बैटरियों के सेकेंड-लाइफ उपयोग जैसे ऊर्जा भंडारण (मदमतहल ेजवतंहम) में दोबारा इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी।
अगर ईवी पॉलिसी 2.0 के तहत तय किए गए लक्ष्य समय पर पूरे होते हैं, तो इसका प्रभाव कई उद्देश्यों में हो सकता है। सबसे पहले, बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों और वाहनों के संचालन से वायु प्रदूषण में कमी आ सकती है, क्योंकि ईवी शून्य टेलपाइप उत्सर्जन देते हैं। इससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है। साथ ही, इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की परिचालन लागत जैसे ईंधन और मेंटेनेंस दीर्घकाल में डीजल बसों की तुलना में कम हो सकती है, जिससे सरकारी खर्च में बचत होगी।
इसके अतिरिक्त, ईवी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी प्रबंधन और सर्विस सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटने से ऊर्जा आयात बिल पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। अगर ये मॉडल सफल रहता है, तो दिल्ली अन्य महानगरों के लिए स्वच्छ और टिकाऊ शहरी परिवहन का उदाहरण बन सकती है।
Trending
- पड़ोसी के सेफ्टिक टैंक में गिरकर मासूम भाई-बहन की मौत
- सरकार और अभिभावक बच्चों को अनुशासित स्वस्थ तो फिर शिक्षक सस्पेंड क्यों
- दिल्ली सरकार जल्द ही ईवी पॉलिसी 2.0 लागू करने की तैयारी में
- इमरान खान के अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्रिकेट कप्तानों को अदालत का सहारा भी लेना चाहिए
- अखिलेश यादव को संघ में जाने और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आने का यूपी सीएम ने दिया सुझाव
- जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते नौकरशाह : माता प्रसाद पांडेय
- गुरुग्राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट पति ने ही की थी बैंककर्मी पत्नी की हत्या, कैंची से किए 6 वार, दो माह की प्रेग्नेंट थी महक
- राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू 19 मार्च को अयोध्या आएंगी, 400 श्रमिकों को करेंगी सम्मानित : नृपेंद्र मिश्रा

