Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मृत मां का सिर गोद में लेकर स्टेशन पर आठ घंटे बैठे रहे बच्चे
    • ट्रायल जज के फैसले को निरस्त कर हाईकोर्ट जज की टिप्पणी दिनदहाड़े न्यायिक हत्या से मिलेगी राहत
    • ओडिशा और झारखंड के अधिकारी भी बंगाल एसआईआर में होंगे शामिल
    • मंजू राय जैसे कानपुर नगर निगम से संबंध मामलों में दोषी अफसरों को बख्शा नहीं जाना चाहिए
    • मुख्यमंत्री जी का सार्वजनिक उपक्रमों की भूमि खाली कराने का निर्णय है सराहनीय, गरीब नौजवानों को रहने व उद्योग लगाने के लिए दी जाए जगह
    • सरकार ने 5 OTT प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया, अश्लील कंटेंट दिखाने पर एक्शन
    • एक हजार रुपये में बेची जा रही थीं संगम एक्सप्रेस में सीटें
    • दुनिया का पहला वातानुकूलित द्वीप कतर में है
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»न्यूज़»सहमति से बनाया गया यौन संबंध अपराध नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
    न्यूज़

    सहमति से बनाया गया यौन संबंध अपराध नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट

    adminBy adminJanuary 30, 2026No Comments2 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    प्रयागराज, 30 जनवरी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो वयस्क सहमति से लंबे समय तक संबंध बनाए रखते हैं तो बाद में विवाह का वादा पूरा न होने मात्र से उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-69 के तहत शादी के झूठे वादे पर संबंध बनाने के मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रही मुकदमे की कार्यवाही रद्द कर दी।
    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सहमति से विवाह के वादे और उसके कारण बने यौन संबंध को अपराध नहीं का जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह का झूठा वादा कर सहमति से बनाए गए यौन संबंध को अपराध करार नहीं दिया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने झूठे विवाह-प्रलोभन के आधार पर यौन संबंध बनाने के मामले में आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी।
    अलीगढ़ के जितेंद्र पाल और दो अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच ने यह फैसला दिया। दरअसल, अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने में दर्ज एक मामले में याचियों के खिलाफ पीड़िता ने मुकदमा दर्ज़ कराया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि याची ने विवाह का झूठा वादा कर उसके साथ यौन संबंध बनाए। साथ ही याची के भाई और भाभी पर आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की धारा 69 और 351(2) के तहत चार्जशीट दाखिल की। एफआईआर के अनुसार पीड़िता और याची वर्ष 2015-16 से एक-दूसरे को जानते थे और कॉलेज के समय से उनके बीच प्रेम संबंध थे। वर्ष 2021 से दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने, जो नवंबर 2024 तक चले।
    पीड़िता का आरोप था कि यह संबंध शादी के झूठे वादे के आधार पर बनाए गए और बाद में विवाह से इंकार कर दिया गया। जांच के दौरान जबरन गर्भपात संबंधित आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी, इस कारण उस धारा में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दोनों वयस्क और शिक्षित थे। उनका रिश्ता लंबे समय तक चला। दोनों में शुरुआत से ही प्रेम संबंध थे और विवाह का आश्वासन सही नीयत से किया गया प्रतीत होता है। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि शुरू से ही विवाह का वादा धोखाधड़ी से किया गया था।
    कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जब दो समझदार वयस्क वर्षों तक सहमति से शारीरिक संबंध कायम रखते हैं तो मान लिया जाता है कि इसमें उनकी स्वेच्छा थी। बाद में विवाह न हो पाने को दंडनीय अपराध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने पीड़िता के बयानों और मामले के तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि इसमें आरोपी के खिलाफ कोई स्पष्ट आपराधिक मामला नहीं बनता। ऐसे में अर्जी स्वीकार करते हुए मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।

    Consensual sexual relations are not a crime: Allahabad High Court Court Order prayagraj tazza khabar tazza khabar in hindi Uttar Pradesh
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    मृत मां का सिर गोद में लेकर स्टेशन पर आठ घंटे बैठे रहे बच्चे

    February 25, 2026

    ट्रायल जज के फैसले को निरस्त कर हाईकोर्ट जज की टिप्पणी दिनदहाड़े न्यायिक हत्या से मिलेगी राहत

    February 25, 2026

    ओडिशा और झारखंड के अधिकारी भी बंगाल एसआईआर में होंगे शामिल

    February 25, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.