नई दिल्ली, 11 अप्रैल (जा)। अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन भारतीय निर्यात का बड़ा बाजार बन सकता है। कैमरून में वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल व चीन के वाणिज्य मंत्री वैंग वेंटो की विशेष मुलाकात के बाद चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों में नई गर्माहट की उम्मीद की जा रही हैं।
अभी भारत अमेरिका को सबसे अधिक निर्यात करता है और दूसरा स्थान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का है। लेकिन चीन को होने वाले निर्यात में बीते वित्त वर्ष 2025-26 में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान अमेरिका को भारतीय निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले चार प्रतिशत, यूएई को नौ प्रतिशत तो चीन को निर्यात में 38 प्रतिशत का इजाफा रहा। हालांकि, भारत चीन से सबसे अधिक आयात करता है। वित्त वर्ष 2025-26 के फरवरी तक भारत ने चीन से 119 अरब डालर का आयात किया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। पिछले वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में भारत ने चीन को 17 अरब डालर का निर्यात किया। यानी चीन से हमारा व्यापार घाटा 11 माह में ही 102 अरब डालर पहुंच गया है।
गोयल ने कहा कि करीब सात साल बाद भारत और चीन के वाणिज्य मंत्री की मुलाकात हुई। कैमरून में विश्व व्यापार संगठन की बैठक से इतर हुई मुलाकात में भारत ने चीन के समक्ष व्यापार घाटे के मुद्दे को उठाते हुए दोनों देशों के बीच संतुलित व्यापार की मांग की। फार्मा व इंजीनियरिंग वस्तुओं के लिए चीन को अपने दरवाजे खोलने के लिए भी कहा गया। विभिन्न तकनीकी दिक्कतों की वजह से दवा के साथ कई खाद्य वस्तुओं का चीन को निर्यात नहीं हो पा रहा है। भारत ने चीन से इन अड़चनों को दूर करने के लिए कहा है। हाल ही में भारत ने चीन की कंपनियों से जुड़े निवेश के नियमों में भी बदलाव किया है। नए बदलावों के तहत चीन की कंपनियां अब भारतीय कंपनियों में 10 प्रतिशत तक का निवेश बिना सरकारी इजाजत कर सकेंगी। जानकारों का कहना है कि चीन की कंपनियों को निवेश की इजाजत देने के साथ सात साल के बाद दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों की मुलाकात वैश्विक व्यापार के पटल पर नए संकेत हैं। चीन से होने वाले आयात का आधा भी भारत अगर चीन को निर्यात करने लगे तो भारत का सबसे अधिक व्यापार चीन के साथ हो जाएगा। विदेश व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल जो वैश्विक हालात है, उसमें चीन भारत की अनदेखी नहीं कर सकता है। इसका कारण यह है कि भारत चीन का बड़ा खरीदार हैं और भारत से मांग कम होने पर चीन की मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां प्रभावित होंगी। यही वजह है कि चीन भारत को पुरानी दर पर ही कच्चा माल दे रहा है। हालांकि, परिवहन खर्च अधिक होने से भारत में उस माल की कीमत बढ़ गई है।
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