नई दिल्ली 16 फरवरी। नए साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है और इस साल की पहली खगोलीय घटना होने जा रही है. बता दें कि साल का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी 2026, यानी की कल लगने जा रहा है. ये एनुलर सूर्यग्रहण होगा, जिसमें सूर्य कंगन की तरह दिखाई देगा, जिसे आम भाषा में रिंग ऑफ फायर कहा जाता है. इस दौरान चंद्रमा सूरज के लगभग 96% हिस्से को ढक देगा. लेकिन इस दौरान किनारों पर आग की तरह चमकती हुई एक पतली सी अंगूठी दिखाई देगी.
नए साल का पहला सूर्यग्रहण लगने में अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं. यह सूर्यग्रहण एक गोल किनारे वाला सूर्यग्रहण है, जिसे इसकी अंगूठी जैसी आकृति के कारण रिंग ऑफ फायर कहा जाता है. इसमें चंद्रमा सूर्य के आगे आकर इसे कवर कर लेता है, लेकिन छोटे होने के कारण सूर्य का जो बचा हुआ हिस्सा दिखाई देता है वो किसी कंगन की तरह लगता है.
पूर्ण सूर्यग्रहण से अलग ये सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी सबसे दूर की स्थिति में या फिर उसके पास होता है. इस दूरी के कारण, चंद्रमा आकाश में थोड़ा छोटा दिखाई देता है और सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता है. जिसके बाद यह एक गहरे चक्र के चारों ओर जलती हुई अंगूठी जैसी अद्भुत छवि बनाता है. नासा के मुताबिक यह विशेष ग्रहण लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक चलेगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य के केंद्र का लगभग 96 फीसदी भाग ढक लेगा.
बता दें कि 17 फरवरी की सुबह 07:01 यूटीसी पर सूर्यग्रहण शुरू होगा. ये सबसे ज्यादा साफ अंटार्कटिका में दिखेगा. यह सूर्यग्रहण खासकर रिसर्च स्टेशनों जैसे कोंकोर्डिया और मिर्नी में, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और जाम्बिया, तंजानिया जैसे देशों में दिखाई देगा. दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों जैसे अर्जेंटीना और चिली में भी यह खगोलीय घटना दिखाई देगी.
हालांकि मिली जानकारी के अनुसार, भारत में यह सूर्यग्रहण नहीं दिखाई देगा. क्योंकि सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा. क्योंकि यह संयोग दक्षिणी गोलार्ध में होता है, भारत पूरी तरह से चंद्रमा की छाया के रास्ते से बाहर है. इसका साफ मतलब है कि जहां एक ओर दुनिया के कई हिस्सों में लोग रिंग ऑफ फायर को देख सकेंगे, तो वहीं, भारत में लोग इसे सीधे नहीं देख पाएंगे.

