कोलकाता, 11 अप्रैल। हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के बीच बंगाल चुनाव के लिए हुआ गठबंधन टूट गया।
एआईएमआईएम ने यह घोषणा उस वीडियो के वायरल होने पर की, जिसमें कबीर पर कथित तौर पर भाजपा के साथ करोड़ों की सौदेबाजी के आरोप लगे हैं। वहीं, ओवैसी के ऐलान के बाद कबीर ने इससे कोई असर नहीं होने का दावा किया है। उन्होंने आरोपों को भी खारिज किया। गुरुवार को टीएमसी द्वारा वीडियो जारी करने के बाद शुक्रवार को एआईएमआईएम ने एक्स पर पोस्ट में गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया। पार्टी ने लिखा, ‘पार्टी पश्चिम बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी।
ओवैसी की पार्टी की तरफ से यह घोषणा कबीर की बातों और खुलासों के बाद की गई है, जिसके बारे में एआईएमआईएम ने कहा कि इससे मुसलमानों की ईमानदारी को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं. एक कड़े बयान में, पार्टी ने कहा कि वह “ऐसे किसी भी बयान से नहीं जुड़ सकती जिसमें मुसलमानों की ईमानदारी पर सवाल उठाया गया हो. इसके साथ ही पार्टी ने आधिकारिक तौर पर हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी से गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया.
एआईएमआईएम ने इस मौके पर पश्चिम बंगाल में मुसलमानों को लगातार सामाजिक-आर्थिक रूप से अलग-थलग किए जाने के विषय को भी प्रमुखता से उठाया. पार्टी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय सबसे गरीब, नजरअंदाज और दबा हुआ बना हुआ है, जबकि दशकों से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और पिछली सरकारों समेत सेक्युलर राजनीतिक ढांचे का दावा करने वाली पार्टियों ने राज किया है.
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “हुमायूं कबीर के खुलासे से पता चला है कि बंगाल के मुसलमान कितने कमजोर हैं. एआईएमआईएम ऐसे किसी भी बयान से नहीं जुड़ सकती जिसमें मुसलमानों की ईमानदारी पर सवाल उठाया गया हो. आज से, AIMIM ने कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन वापस ले लिया है.
पार्टी ने आगे कहा कि, बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब, नजरअंदाज और दबे हुए समुदायों में से एक हैं. दशकों के सेक्युलर शासन के बावजूद, उनके लिए कुछ नहीं किया गया है. किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने की AIMIM की नीति यह है कि हाशिए पर पड़े समुदायों की एक आजाद राजनीतिक आवाज हो.

