नयी दिल्ली, 09 अप्रैल (दिप्रिं) राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने पान मसाला ब्रांड से जुड़े कथित भ्रामक विज्ञापन से संबंधित मामले में अभिनेता सलमान खान के खिलाफ जारी जमानती वारंट के निष्पादन पर रोक लगा दी है। आयोग ने इसके साथ ही निर्देश दिया है कि कार्यवाही के मूल रिकॉर्ड उसके समक्ष पेश किए जाएं।
एनसीडीआरसी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.पी. साही और सदस्य भरत कुमार पांडे की पीठ ने राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग को जयपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से संपूर्ण रिकॉर्ड मंगवाने और उन्हें राष्ट्रीय आयोग के रजिस्ट्रार को भेजने का आदेश दिया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि दी गई दलीलों को समझने के लिए जिला आयोग के साथ ही राज्य आयोग के रिकॉर्ड की पड़ताल करना उचित होगा।
आयोग ने निर्देश दिया कि अभिलेख (रिकॉर्ड), जिनमें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत शुरू की गई कार्यवाही भी शामिल है, जिला आयोग से मंगवाकर एक विशेष संदेशवाहक के माध्यम से भेजी जाएं।
एनसीडीआरसी ने कहा कि इस मामले के विचाराधीन रहने तक जिला आयोग द्वारा जारी किए गए किसी भी वारंट के क्रियान्वयन पर रोक (स्थगन) रहेगी। आदेश में कहा गया, “हम यह भी निर्देश देते हैं कि जिला आयोग द्वारा जारी किए गए किसी भी वारंट का निष्पादन हमारे समक्ष इस मामले के निपटारे तक स्थगित रहेगा।” शिकायतकर्ता, अधिवक्ता योगेंद्र सिंह बडियाल को एक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें निर्देश दिया गया है कि इसे राज्य और जिला उपभोक्ता आयोग दोनों के माध्यम से तामील कराया जाए। इसके अतिरिक्त, नोटिस पंजीकृत स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाएगा।
उसने कहा कि अतः हम निर्देश देते हैं कि राजस्थान राज्य आयोग, इस विषय से संबंधित जिला आयोग के संपूर्ण अभिलेखों को मंगवाए।” इसके अतिरिक्त, पीठ ने निर्देश दिया कि चूंकि जिला आयोग के मूल अभिलेखों को तलब किया गया है, इसलिए आदेशों के अनुसार आगे की सभी कार्यवाही तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि इस मामले पर आयोग द्वारा विचार नहीं किया जाता।
जिला आयोग से पहले निर्देश प्राप्त कर चुके अधिकारियों को भी राष्ट्रीय आयोग के समक्ष जारी कार्यवाही के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया गया। इस मामले की सुनवाई 14 अप्रैल, 2026 को निर्धारित की गई। इससे पहले गत दिवस, खान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश ने दलील दी थी कि जिला आयोग ने अभिनेता को आदेशों की उचित तामील कराए बिना जमानती वारंट जारी करने सहित दंडात्मक और अनुचित उपाय अपनाए हैं।
उन्होंने दलील दी कि आदेशों की प्रमाणित प्रतियों के लिए आवेदन लंबित हैं, जबकि आदेशों की खबर मीडिया में आ चुकी है। याचिका के अनुसार, जिला आयोग ने खान की पेशी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्य बल गठित करने का भी निर्देश दिया था, जिसे वकील ने उपभोक्ता कार्यवाही में असामान्य बताया। यह विवाद दिसंबर 2025 में जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग में राजश्री पान मसाला और खान के खिलाफ दायर एक शिकायत से उत्पन्न हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि उनका विज्ञापन पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन है। खान को ‘राजश्री इलायची’ के ब्रांड एंबेसडर के रूप में विपक्षी पार्टी संख्या 2 के रूप में नामित किया गया था।
छह जनवरी, 2026 को जिला आयोग ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए प्रतिवादियों को भ्रामक विज्ञापन जारी करने से रोकने का निर्देश दिया। खान की याचिका के अनुसार, यह आदेश उन्हें बिना सूचना दिए एकतरफा पारित किया गया था। इसके बाद, अभिनेता की तस्वीर वाले एक होर्डिंग के आधार पर आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अधिनियम की धारा 72 के तहत एक अवमानना याचिका दायर की गई। पंद्रह जनवरी, 2026 को जिला आयोग ने अवमानना कार्यवाही में खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए। खान ने अधिनियम की धारा 73 के तहत राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग के समक्ष इस आदेश को चुनौती दी।
हालांकि, 16 मार्च, 2026 के एक फैसले में, राज्य आयोग ने अपील खारिज कर दी और जमानती वारंट को बरकरार रखा।
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