लखनऊ 10 मार्च। लखनऊ में योगी कैबिनेट की मंगलवार को बैठक हुई। इस दौरान 31 प्रस्ताव पेश हुए। इनमें से 30 पारित हुए। सबसे बड़ा फैसला फर्जी रजिस्ट्री को रोकने को लेकर हुआ। अब किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले विक्रेता का नाम खतौनी में मिलान किया जाएगा। यदि नाम अलग पाया जाता है तो रजिस्ट्रेशन विभाग इसकी जांच करेगा।
सरकार ने सर्किल रेट पर एक प्रतिशत शुल्क और विकास शुल्क के दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया है। पहले यह राशि यूसी जारी होने के बाद निकायों को दी जाती थी, जिसे अब छमाही आधार पर जारी किया जाएगा।
परिवहन विभाग से जुड़े प्रस्ताव के तहत सीएम ग्राम परिवहन योजना 2026 को स्वीकृति दी गई है। योजना के तहत 59,163 ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ा जाएगा। जिन 12,200 गांवों में अब तक बस सेवा नहीं थी, वहां भी 28 सीटर बसें चलाई जाएंगी। बस सेवा टैक्स फ्री होगी और निजी क्षेत्र को भी संचालन की अनुमति दी जाएगी।
संचालन का अनुबंध 10 वर्ष का होगा
ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत बसों की औसत आयु 15 वर्ष तय की गई है, जबकि संचालन का अनुबंध 10 वर्ष का होगा। योजना के तहत बस सेवा को पहली बार परमिट, अनुबंध और टैक्स से मुक्त रखा जाएगा। सरकार के अनुसार करीब 5000 ऐसे गांव हैं जहां अब तक कभी बस नहीं पहुंची। शुरुआत में हर रूट पर दो बसें चलाई जाएंगी।
वहीं मोटर व्हीकल कानून में संशोधन कर केंद्र सरकार के नियमों को अपनाया जाएगा। इसके तहत Ola और Uber जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को राज्य में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ड्राइवरों की फिटनेस जांच, मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन भी जरूरी किया जाएगा।
एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये और लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये तय की गई है। लाइसेंस का नवीनीकरण हर पांच साल में 5 हजार रुपये शुल्क के साथ होगा। सरकार खुद का परिवहन ऐप भी विकसित करेगी, जिसमें ड्राइवरों की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी और उनकी ट्रेनिंग भी कराई जाएगी।
शहरी आवास की सीमा बढ़ी, कर्मचारियों के निवेश नियम सख्त
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 22 वर्गमीटर तक के आवास की लागत सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी गई है। अब 30 वर्गमीटर तक मकान का निर्माण किया जा सकेगा। इसमें 1 लाख रुपये राज्य सरकार और 1.5 लाख रुपये केंद्र सरकार की ओर से सहायता दी जाएगी।
सरकार ने कांशीराम आवास योजना के खाली पड़े मकानों की मरम्मत और रंगाई-पुताई कराकर उन्हें दलित परिवारों को देने का फैसला किया है। वहीं सरकारी कर्मचारियों की सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि छह माह के मूल वेतन से अधिक निवेश की जानकारी देनी होगी और हर वर्ष अपनी अचल संपत्ति की घोषणा करनी होगी।
इसके अलावा अयोध्या में खेल परिसर के लिए 2500 वर्गमीटर भूमि नगर निगम को हस्तांतरित करने, कई जिलों में समग्र शहरी योजना लागू करने, कानपुर ट्रांस गंगा सिटी के लिए चार लेन पुल बनाने तथा बुंदेलखंड क्षेत्र में बांदा और झांसी के डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला
कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए कार्मिक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया, ‘अब छह महीने के मूल वेतन की राशि स्टॉक मार्केट या शेयर मार्केट में लगाने पर उसकी सूचना प्राधिकृत अधिकारी को देनी होगी।
अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने दो महीने की सैलरी से ज्यादा वैल्यू की किसी भी चल संपत्ति (जैसे- गाड़ी, सोना) का लेनदेन करता है, तो उसे इसकी सूचना देनी होगी। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाएगा। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा।’
यूनिवर्सिटी और कॉलेज शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस बीमा
कैबिनेट ने प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग के एडेड डिग्री कॉलेज में कार्यरत नियमित और स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को बड़ा तोहफा दिया। इन्हें अब कैशलेस इलाज के अलावा पांच लाख रुपए तक का हेल्थ बीमा दिया जाएगा।
प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षकों और स्टेट यूनिवर्सिटी में नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम शिक्षकों को भी इसका फायदा मिलेगा। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया- योजना से 1,28,725 शिक्षकों को फायदा होगा।

